मुंबई।
शेयर बाजार में गिरावट अब सिर्फ एक-दो कारोबारी दिनों की कहानी नहीं रह गई है।सेंसेक्स और निफ्टी लगातार आठवें हफ्ते गिरकर बंद हुए हैं।और सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 25 साल बाद भारतीय बाजार में इतनी लंबी लगातार साप्ताहिकगिरावट देखने को मिली है। निफ्टी की यह लगातार आठ हफ्तों की गिरावट 2001 के बाद सबसे लंबी श्रृंखला है।
गुरुवार, 1 अक्टूबर को भी बाजार में बिकवाली का दबाव जारी रहा। सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत टूटकर 22,421.95 पर बंद हुआ।
लेकिन सवाल है—
आखिर बाजार लगातार क्यों गिर रहा है? इसके पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, रुपये पर दबाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई और व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ती है। दूसरी तरफ अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.3 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर आधारित बॉन्ड अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाते हैं और उभरते बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है।
आठ हफ्तों में निफ्टी 8.74 प्रतिशत नीचे
इस सप्ताह निफ्टी में करीब 3.11 प्रतिशत की गिरावट आई। आठ सप्ताह की अवधि में इसकी कुल गिरावट करीब 8.74 प्रतिशत हो चुकी है। सबसे ज्यादा दबाव ऑटो और कुछ बड़े शेयरों में दिखाई दिया। आठ सप्ताह के दौरान—
- Tata Motors Passenger Vehicles: -19.48%
- Maruti Suzuki: -18.89%
- Mahindra & Mahindra: -18.33%
- Jio Financial Services: -17.25%
- TCS: -15.40%
यानी बाजार की गिरावट केवल इंडेक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बड़े और चर्चित शेयर भी इसकी चपेट में हैं।
लेकिन हर शेयर नहीं टूटा
इस गिरावट के बीच कुछ शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। आठ सप्ताह की अवधि में Kotak Mahindra Bank करीब 7.06 प्रतिशत ऊपर रहा। इसके अलावा—
Dr. Reddy's Laboratories 2.92 प्रतिशत, Adani Ports 2.62 प्रतिशत और Coal India 1.24 प्रतिशत तक चढ़े।
इससे साफ है कि बाजार में गिरावट के बावजूद सभी सेक्टर और सभी शेयर एक जैसे प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं।
निवेशकों की संपत्ति पर कितना असर?
28 अगस्त 2026 को BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 494 लाख करोड़ रुपये बताया गया था। 1 अक्टूबर तक यह घटकर करीब 468 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी इस अवधि में लगभग 26 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप की कमी आई। सिर्फ 1 अक्टूबर के कारोबार में ही करीब 5 लाख करोड़ रुपये की निवेशक संपत्ति कम हुई, जबकि सप्ताह के शुरुआती कारोबारी दिन करीब 8 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
अब सबसे बड़ा सवाल—आगे क्या?
बाजार के सामने फिलहाल चार बड़ी चुनौतियां दिखाई दे रही हैं—
पहली—FII की बिकवाली।
दूसरी—कच्चे तेल की कीमत।
तीसरी—अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक ब्याज दरों का दबाव।
और चौथी—रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया का तनाव।
यानी बाजार की कहानी फिलहाल सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था की कहानी नहीं है। यह कहानी Global Liquidity, Crude Oil, Dollar और Geopolitical Risk से भी जुड़ चुकी है। और यही वजह है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी पर नहीं, बल्कि कच्चे तेल, डॉलर-रुपये की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों के रुख पर भी रहेगी।
(निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।)