रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट शुल्क के नाम पर छात्रों से कथित तौर पर भारी रकम वसूलने का मामला सामने आया है। छात्रों के पालकों ने आरोप लगाया है कि इन सुविधाओं के नाम पर प्रति छात्र हर साल 4.50 लाख रुपये से अधिक की राशि ली जा रही है। पालकों ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पालकों की ओर से निश्चिय बाजपेयी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022-23 से हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट शुल्क में अचानक बढ़ोतरी की गई। साथ ही, जिन सुविधाओं को स्वैच्छिक होना चाहिए, उन्हें छात्रों के लिए अनिवार्य बना दिया गया।
NMC और DME के नियमों के उल्लंघन का आरोप
पालकों का कहना है कि निजी मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि छात्रों पर हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाएं लेने का दबाव बनाया जाता है, जबकि इनका लाभ लेना स्वैच्छिक होना चाहिए।
पालकों के मुताबिक, इन सुविधाओं के लिए शुल्क 'नो प्रॉफिट, नो लॉस' के आधार पर लिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्ष 2022-23 से शुल्क में अचानक बढ़ोतरी होने के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर कार्रवाई की अनुशंसा का दावा
पालकों ने बताया कि उनकी शिकायत पर पहले प्रवेश तथा फीस नियामक समिति ने मामले की जांच की थी। उनके दावे के अनुसार, समिति ने छात्रों से वसूली गई राशि लौटाने और तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर 10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाने की अनुशंसा की थी। इसके बाद राज्य शासन की ओर से आदेश भी जारी किया गया।
हालांकि, पालकों का आरोप है कि आदेश जारी होने के करीब एक साल बाद भी संबंधित कॉलेजों ने उसका पालन नहीं किया। उनका दावा है कि नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों से भी इसी तरह शुल्क वसूला गया।
शासन के आदेश, उसकी शर्तों और संबंधित कॉलेजों द्वारा किए गए अनुपालन की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
तीन साल में 500 करोड़ रुपये की वसूली का दावा
पालकों ने निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे करीब 3,000 छात्रों का हवाला देते हुए पिछले तीन वर्षों में लगभग 500 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया है। उनका कहना है कि प्रति छात्र सालाना 4.50 लाख रुपये से अधिक की राशि के हिसाब से यह आर्थिक बोझ काफी बड़ा है।
पालकों ने यह भी दावा किया कि शासन ने कथित तौर पर वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, उनके मुताबिक चालू वर्ष में भी लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई है।
हालांकि, 500 करोड़ और 150 करोड़ रुपये की इन राशियों की स्वतंत्र पुष्टि तथा कॉलेजवार शुल्क विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आंकड़ों को पालकों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव से हस्तक्षेप की मांग
पालकों ने आरोप लगाया कि शुल्क के लिए दबाव बनाया जा रहा है और छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की धमकी दिए जाने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने मामले में कुछ बिचौलियों की भूमिका होने का भी आरोप लगाया है।
इस पूरे मामले को लेकर पालकों ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को पत्र सौंपकर हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
अब मामले में स्वास्थ्य विभाग का रुख, शासन के पूर्व आदेश की वास्तविक स्थिति और संबंधित निजी मेडिकल कॉलेजों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। उपलब्ध जानकारी में विभाग और कॉलेज प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।