स्कूल के सामने भारी वाहनों की आवाजाही; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ( मुकेश जायसवाल )

क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा? यह सवाल इन दिनों कोटमी के रानी दुर्गावती चौक पर खड़े स्थानीय लोगों, राहगीरों और स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं की चिंता को सामने लाता है।

कोटमी का यह चौक मुख्य हाईवे मार्ग को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ता है। इसी चौराहे के समीप कन्या हाई स्कूल सकोला स्थित है, जहां दूरदराज के इलाकों से बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ने आती हैं। सुबह स्कूल लगने और छुट्टी के समय यहां विद्यार्थियों की भीड़ बढ़ जाती है। दूसरी ओर भारी वाहनों, विशेषकर हाईवा की लगातार आवाजाही स्थिति को और गंभीर बना देती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चौक पर पर्याप्त ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था दिखाई नहीं देती। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच स्कूली बच्चों को सड़क पार करने और बसों का इंतजार करने में जोखिम उठाना पड़ता है।

सबसे चिंताजनक स्थिति उन छात्राओं की है जो दूर-दराज के गांवों से बसों के जरिए स्कूल आती हैं। बस का इंतजार करने के लिए उन्हें सड़क किनारे खड़ा होना पड़ता है। सवाल यह है कि जिस स्थान पर रोजाना स्कूली बच्चे खड़े होते हैं, वहां सुरक्षित बस-स्टॉप या व्यवस्थित प्रतीक्षा स्थल क्यों नहीं है?


स्कूल के सामने अतिक्रमण का सवाल

स्थानीय स्तर पर स्कूल परिसर के सामने कथित बेजा कब्जे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि सड़क और स्कूल के आसपास अव्यवस्थित कब्जे तथा निर्माण के कारण आने-जाने की जगह और अधिक सीमित हो रही है।

यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि वास्तव में स्कूल के सामने अतिक्रमण है, तो संबंधित विभाग ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या इसकी जांच हुई है? और यदि जांच हुई है तो कार्रवाई का नतीजा क्या रहा?

वेरीकेट को लेकर भी विवाद

चौराहे पर भारी वाहनों की गति और दुर्घटना की आशंका को देखते हुए लगाए गए वेरीकेट को लेकर भी विवाद सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यातायात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लगाए गए वेरीकेट को एक भाजपा नेता द्वारा अपनी निजी संपत्ति बताते हुए अपने घर की ओर लगा दिया गया।

हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि वेरीकेट वास्तव में सार्वजनिक यातायात व्यवस्था के लिए लगाया गया था, तो उसे हटाने या निजी उपयोग में लेने की अनुमति किसने दी? क्या प्रशासन ने इसकी जांच की?

और सबसे बड़ा सवाल—यदि इस चौराहे पर वेरीकेट या ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था हटने के बाद कोई गंभीर दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?


कानून व्यवस्था से बड़ा सवाल—जवाबदेही

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था, भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम नजर नहीं आते।

मामला केवल ट्रैफिक जाम का नहीं है। मामला उन बच्चों की सुरक्षा का है जो रोजाना शिक्षा हासिल करने के लिए इस रास्ते से गुजरते हैं।

प्रशासन चाहे तो यहां भारी वाहनों के लिए गति सीमा और निर्धारित मार्ग व्यवस्था लागू कर सकता है, पीक स्कूल टाइम में ट्रैफिक पुलिस की तैनाती कर सकता है, जेब्रा क्रॉसिंग और स्पीड ब्रेकर बनवा सकता है तथा छात्राओं के लिए सुरक्षित बस प्रतीक्षा स्थल तैयार कर सकता है।

लेकिन सवाल यही है कि ये कदम किसी दुर्घटना से पहले उठेंगे या दुर्घटना के बाद?

स्कूल की छात्राओं और स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित जिला प्रशासन से मांग की है कि रानी दुर्गावती चौक की तत्काल जांच कराकर वहां स्थायी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

क्योंकि सड़क पर खतरा दिखाई दे रहा हो और प्रशासन उससे अनजान बना रहे, तो सवाल सिर्फ व्यवस्था का नहीं रहता—जवाबदेही का भी बन जाता है।

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