SCG News | नई दिल्ली : यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किए जाने के बयान के बाद बीजेपी के सहयोगी दलों ने अपने-अपने रुख स्पष्ट करने शुरू कर दिए हैं।
सबसे पहले बीजेपी की प्रमुख सहयोगी JDU ने साफ किया है कि वह UCC पर चर्चा के खिलाफ नहीं है, लेकिन इतने संवेदनशील विषय पर कानून लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और सभी पक्षों की सहमति जरूरी है।
इसी सिलसिले में JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात का समय मांगा है। माना जा रहा है कि संभावित बैठक में UCC को लेकर JDU की चिंताओं और पार्टी के पुराने रुख पर चर्चा हो सकती है।
JDU का सवाल—UCC पर पहले व्यापक संवाद क्यों नहीं?
JDU नेताओं का कहना है कि UCC जैसे संवेदनशील विषय पर आगे बढ़ने से पहले विभिन्न समुदायों, धार्मिक प्रतिनिधियों, अल्पसंख्यकों, राज्य सरकारों और दूसरे हितधारकों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
पटना में JDU नेता नीरज कुमार ने कहा कि पार्टी का UCC को लेकर रुख पहले से स्पष्ट है। उनके मुताबिक, जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने इस विषय पर विधि आयोग को पत्र लिखा था और वही पत्र पार्टी के रुख का आधार है।
JDU का तर्क है कि UCC की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी भी समुदाय की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को अनावश्यक ठेस न पहुंचे। पार्टी संविधान में मिले समान अधिकारों और विविधता के बीच संतुलन की बात कर रही है।
नीरज कुमार ने यह भी सवाल उठाया कि अभी तक UCC का कोई आधिकारिक ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में अंतिम प्रावधानों पर प्रतिक्रिया देने से पहले मसौदा सामने आना और उस पर व्यापक चर्चा होना जरूरी है।
चिराग पासवान भी बोले—ड्राफ्ट आने के बाद तय होगा रुख
JDU के बाद अब चिराग पासवान की पार्टी ने भी UCC को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
चिराग पासवान का कहना है कि उनकी पार्टी समानता और विविधता, दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि UCC का वास्तविक प्रारूप सार्वजनिक होने के बाद ही पार्टी इस पर अपना स्पष्ट पक्ष रखेगी।
इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि UCC को लेकर बीजेपी को अपने सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक और वैचारिक संवाद की जरूरत पड़ सकती है।
TDP के रुख पर भी नजर
NDA के एक अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी TDP का पुराना रुख भी UCC को लेकर सावधानी वाला रहा है। पार्टी की ओर से पहले कहा जाता रहा है कि UCC के किसी भी प्रस्तावित मसौदे पर व्यापक चर्चा और बहस होनी चाहिए।
अगस्त 2024 में TDP नेताओं की ओर से मुस्लिम समुदाय के हितों की सुरक्षा की बात कही गई थी। TDP नेता नारा लोकेश भी UCC जैसे मुद्दों पर सहयोगी दलों के साथ चर्चा और सहमति बनाने की आवश्यकता जता चुके हैं।
हालांकि, अमित शाह के ताजा बयान के बाद TDP की ओर से अभी कोई नया आधिकारिक रुख सामने नहीं आया है।
अमित शाह ने क्या कहा था?
13 सितंबर को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने UCC को लेकर बड़ा बयान दिया था।
उन्होंने कहा था कि 2029 से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा। शाह ने यह भी कहा कि कई राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है और उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले NDA के सभी राज्यों में इसे लागू किया जाएगा।
UCC का व्यापक उद्देश्य धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी प्रावधान लागू करना है।
उत्तराखंड मॉडल का दिया जा सकता है उदाहरण
बीजेपी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती UCC को लेकर अपने सहयोगी दलों को साथ लेकर आगे बढ़ने की है।
पार्टी की ओर से यह संकेत दिया जा रहा है कि संवेदनशील मुद्दों पर सहयोगियों से बातचीत की जाती रही है। UCC को लेकर उत्तराखंड मॉडल को भी NDA के सहयोगी दलों के सामने उदाहरण के तौर पर रखा जा सकता है।
बीजेपी का तर्क है कि उत्तराखंड में UCC लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया गया था और उसी प्रक्रिया को दूसरे राज्यों के संदर्भ में भी देखा जा सकता है।
2029 के लक्ष्य के बीच सहयोगियों की परीक्षा
अमित शाह के बयान ने UCC को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। लेकिन बीजेपी के लिए चुनौती केवल विपक्ष का विरोध नहीं, बल्कि NDA के भीतर सहमति बनाए रखना भी होगी।
JDU ने फिलहाल विरोध का रास्ता अपनाने के बजाय संवाद का रास्ता चुना है। संजय झा और अमित शाह की संभावित मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि केंद्र सरकार UCC को लेकर सहयोगी दलों की चिंताओं को किस तरह संबोधित करती है।
अब असली सवाल यही है—
क्या बीजेपी 2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में UCC लागू करने के अपने लक्ष्य को सहयोगियों की सहमति के साथ आगे बढ़ा पाएगी?
या फिर UCC का मुद्दा NDA के भीतर सहमति बनाम राजनीतिक प्राथमिकता की नई परीक्षा बन जाएगा?
फिलहाल निगाहें अमित शाह और संजय झा की संभावित मुलाकात पर टिकी हैं। इस बैठक से यह संकेत मिल सकता है कि UCC पर NDA के भीतर आगे की रणनीति किस दिशा में बढ़ने वाली है।