लखनऊ। चर्चित शिवा शर्मा कांड में गिरफ्तार श्रद्धा दुबे से लखनऊ पुलिस ने घंटों पूछताछ की। पूछताछ के दौरान श्रद्धा ने कानपुर और आगरा जाने सहित कई अहम जानकारियां दीं, लेकिन कुछ सवालों पर चुप्पी साधे रखी। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान वह बार-बार सांस लेने में तकलीफ होने की बात कहती रही और कई सवालों के जवाब देने से बचती रही।
ड्राइवर को साथ रखने के पीछे क्या थी वजह?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा दुबे अपने ड्राइवर तनवीर उर्फ दानिश को साथ रख रही थी। आशंका जताई जा रही है कि उसे डर था कि कहीं ड्राइवर उसके बारे में कोई जानकारी पुलिस को न दे दे। सूत्रों के अनुसार, वह ड्राइवर को अपने बचाव के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही थी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
कानपुर के होटल में कमरा लेने पहुंची थी श्रद्धा
पूछताछ में श्रद्धा ने कानपुर और आगरा जाने की बात स्वीकार की है। जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर को वह कानपुर के एक होटल में कमरा लेने पहुंची थी। लेकिन होटल स्टाफ ने पहचान पत्र मांगा तो वह बिना कमरा लिए वहां से निकल गई।
बताया जा रहा है कि शिवा शर्मा कांड के बाद उसकी तस्वीरें वायरल होने के कारण उसे पकड़े जाने का डर था। इसी आशंका के चलते उसने होटल में रुकने का फैसला बदल दिया और कार से नागपुर की ओर रवाना हो गई।
छोटे होटलों में रुककर छिपाती रही पहचान
पुलिस से बचने के लिए श्रद्धा ने कथित तौर पर अपने ठिकाने लगातार बदले। सूत्रों के मुताबिक, बड़े और लग्जरी होटलों में रुकने की शौकीन श्रद्धा को फरारी के दौरान छोटे होटलों में ठहरना पड़ा। बताया जा रहा है कि वह ऐसे स्थानों की तलाश करती थी, जहां उसकी पहचान उजागर होने की आशंका कम हो।
यह भी जानकारी सामने आई है कि श्रद्धा रायबरेली गई थी, लेकिन अपने घर नहीं पहुंच सकी। इस दौरान वह करीब 11 दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रही।
नेपाल पहुंचने में आमिर की मदद का दावा
श्रद्धा के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी कराया था। पूछताछ के दौरान श्रद्धा ने कथित तौर पर बताया कि आमिर लखनऊ से ही उसके साथ था और उसकी मदद से वह बहराइच के रास्ते नेपाल पहुंची थी।
इस खुलासे के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फरारी के दौरान श्रद्धा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और उसे किन लोगों से मदद मिल रही थी।
मददगारों की भी होगी पहचान
डीसीपी मध्य के मुताबिक, श्रद्धा और अन्य आरोपियों की मदद करने वालों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को शरण देने या उनकी फरारी में मदद करने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा अपने अलग-अलग ठिकानों पर कई लोगों के संपर्क में थी। उसे लगातार मार्गदर्शन दिए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, पूछताछ के दौरान उसने किसी व्यक्ति का नाम नहीं बताया।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरारी के दौरान श्रद्धा की मदद करने वाले लोग कौन थे, नेपाल पहुंचने में उसकी किसने सहायता की और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका रही है? इन सवालों के जवाब जांच और पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।