रायपुर : "जिस तरह गोला-बारूद बिना सही दिशा के सिर्फ विस्फोट करता है, उसी तरह हमारी ऊर्जा भी सही मानसिक दिशा के बिना केवल तनाव बनती है।" — पुलिस ट्रेनिंग स्कूल , माना में आयोजित Quantum Mind Management एवं योग कार्यशाला के दौरान जब डॉ. अनिल के. गुप्ता ने ये बात कही, तो प्रशिक्षणरत नवआरक्षकों की आंखों में एक नई रोशनी थी — शरीर की नहीं, चेतना की।
छत्तीसगढ़ सिख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन, पॉजिटिव हेल्थ
ज़ोन और पुलिस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशिष्ट कार्यशाला ने
एक नई बहस को जन्म दिया – "क्या सोच और आहार ही हैं असली अस्त्र?"
डॉ. अनिल गुप्ता का प्रयोग और मानसिक ऊर्जा का विज्ञान
कार्यशाला के मुख्य वक्ता, श्री गणेश विनायक आई
हॉस्पिटल के निदेशक और पॉजिटिव हेल्थ ज़ोन के संस्थापक डॉ. अनिल के. गुप्ता (MBBS, MS, PhD, FFM) ने
Quantum Mind Management विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रशिक्षणरत महिला-पुरुष
आरक्षकों पर प्रत्यक्ष प्रयोग करते हुए दिखाया कि जब मनोबल और
आहार संतुलित हो, तो सामान्य व्यक्ति भी असाधारण बल का प्रदर्शन कर सकता है।
"दाल-भात से भी शक्तिशाली योद्धा बन सकते हैं, अगर सोच में
ऊर्जा हो।" — डॉ. गुप्ता
डॉ. गुप्ता ने बताया कि नकारात्मक विचार शरीर की मांसपेशियों को कमजोर
करते हैं, जबकि सकारात्मक सोच न केवल शक्ति बढ़ाती है, बल्कि व्यवहार
में भी अनुशासन लाती है।
योग से आत्म-प्रबंधन की कला
कार्यशाला के दूसरे चरण में स्वामी महेश जी
– इंजीनियरिंग स्नातक, योग फिलॉसफी में स्वर्ण पदक प्राप्त मास्टर योग कंसल्टेंट –
ने प्रशिक्षणार्थियों को आसन, प्राणायाम और
ध्यान की व्यावहारिक विधियाँ सिखाईं।
"शरीर के सिपाही को आत्मा के संतुलन की भी ज़रूरत होती है,"
— स्वामी महेश
उन्होंने स्पष्ट किया कि योग केवल
व्यायाम नहीं, एक आंतरिक रणनीति है, जो हर पुलिसकर्मी को मानसिक
स्थिरता, निर्णय क्षमता और जीवनशक्ति प्रदान कर सकता है।
कार्यक्रम का कुशल संचालन नरेंद्र पाण्डेय
द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे सत्र को संवादधर्मी बनाते हुए विज्ञान और
योग को एक-दूसरे के पूरक के रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डॉ. स्मृति सिंह ने सह-समन्वयक
की भूमिका निभाई।
पुलिस अधीक्षक आर. के. मिंज, उप पुलिस अधीक्षक अर्चना
चौधरी , इंस्पेक्टर हरीश तिवारी, छत्तीसगढ़ सिख ऑफिसर्स
वेलफेयर एसोसिएशन के जी.एस. भामरा, एच.एस. ढींगरा,
सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, भूपिंदर सिंह, टी.एस. भाटिया सहित समस्त प्रशिक्षण स्टाफ एवं सैकड़ों
प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने इस अभिनव आयोजन की सराहना करते हुए इसे पुलिस प्रशिक्षण का अभिन्न अंग बताया। सभी ने
यह स्वीकार किया कि मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति के बिना किसी भी शारीरिक प्रशिक्षण
की दिशा अधूरी है।