साक्षात्कार : पदुम सिंह एल्मा (आयुक्त , आबकारी ) से लाईफ वर्सिटी -scgnews.in के संपादक डॉ नरेन्द्र पाण्डेय की


शराब की दुकान आम आदमी के लिए शायद सिर्फ खरीद-बिक्री की जगह हो, लेकिन उसके पीछे एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी तंत्र काम करता है। सप्लाई चेन से लेकर स्टॉक, बिलिंग, बैंकिंग, कैश मैनेजमेंट और उपभोक्ता शिकायतों तक—हर स्तर पर एक मजबूत सिस्टम की जरूरत होती है। इस पूरी व्यवस्था में एक छोटी-सी गड़बड़ी भी सवाल खड़े कर सकती है और एक बेहतर सिस्टम पारदर्शिता तथा जवाबदेही को नई दिशा दे सकता है। आज CSMCL सिर्फ शराब की बिक्री से जुड़ी संस्था के रूप में नहीं, बल्कि technology, data और governance के बदलते दौर में एक बड़े operational system के रूप में चर्चा में है। इसी बदलती व्यवस्था को समझने के लिए लाईफ वर्सिटी-SCGNEWS ने पदुम सिंह एल्मा (आयुक्त , आबकारी / MD . CSMCL ) से बातचीत की। बातचीत में टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से लेकर एमआरपी, ओवर-रेट, कैश मैनेजमेंट, एआई, उपभोक्ता अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारी तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।


नरेन्द्र पाण्डेय : आम तौर पर लोग CSMCL को सिर्फ शराब की दुकानों के संचालन से जोड़कर देखते हैं। वास्तव में CSMCL की भूमिका कितनी व्यापक है?

पदुम सिंह एल्मा : देखिए, CSMCL की भूमिका केवल रिटेल काउंटर तक सीमित नहीं है। इसके पीछे प्रोक्योरमेंट, वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्टेशन, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, रिटेल ऑपरेशंस, बिलिंग, बैंकिंग और मॉनिटरिंग जैसी कई प्रक्रियाएं जुड़ी हैं। हमारा प्रयास यही है कि इस पूरी चेन को अधिक ट्रांसपेरेंट, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और अकाउंटेबल बनाया जाए। आज केवल व्यवस्था चलाना पर्याप्त नहीं है। हमें यह भी देखना है कि व्यवस्था कितनी एफिशिएंट और ट्रांसपेरेंट तरीके से चल रही है।


नरेन्द्र पाण्डेय : शराब के कारोबार में AI की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

पदुम सिंह एल्मा : एआई हमारे लिए केवल तकनीकी प्रयोग नहीं है। इसका उद्देश्य डिसीजन-मेकिंग को डेटा-ड्रिवन बनाना है आज किसी भी बड़े डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में डेटा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे पास अलग-अलग लोकेशन, प्रोडक्ट्स और डिमांड पैटर्न्स से जुड़ा काफी डेटा होता है। AI की मदद से डिमांड को बेहतर तरीके से समझने, इन्वेंट्री प्लानिंग करने और सप्ली चैन में संभावित गैप्स को पहचान करने में मदद मिल सकती है।


नरेन्द्र पाण्डेय : यानी भविष्य में यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में किस तरह की डिमांड आने वाली है?

पदुम सिंह एल्मा : हां, यही इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर किसी विशेष स्थान पर किसी प्रोडक्ट्स की डिमांड लगातार एक पैटर्न दिखाती है, तो उस डेटा का उपयोग इन्वेंटरी प्लानिंग में किया जा सकता है। इससे एक तरफ जमा अनुपयोगी स्टॉक कम करने में मदद मिलेगी और दूसरी तरफ कमी जैसी स्थिति से भी बचा जा सकता है।


नरेन्द्र पाण्डेय : लेकिन उपभोक्ता के स्तर पर सबसे बड़ा सवाल MRP का है। ओवररेटिंग की शिकायतें आती रही हैं। इस पर आपकी क्या प्राथमिकता है?

पदुम सिंह एल्मा : MRP एक स्पष्ट व्यवस्था है और निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री नहीं होनी चाहिए। हमारी व्यवस्था में मॉनिटरिंग और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई का प्रावधान है। जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आता है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। हमारा मानना है कि केवल नियम बना देना पर्याप्त नहीं है। ऐसा सिस्टम होना चाहिए जिसमें ट्रांजिकशन और बिक्री प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध हो और किसी शिकायत की स्थिति में उसकी जांच की जा सके।


नरेन्द्र पाण्डेय : क्या आने वाले समय में तकनिकी ओवर चार्जिंग को पूरी तरह रोक सकती है?

पदुम सिंह एल्मा : देखिये कोई भी टेक्नोलोजी अपने आप में सम्पूर्ण समाधान नहीं होती। तकनीक मोनिटरिंग को मजबूत कर सकती है, ट्रांजिकशन ट्रेल दे सकती है और हो रही अनियमितताओं की पहचान करने में मदद कर सकती है। लेकिन इसके साथ फील्ड लेवल मोनिटरिंग और जवाबदेही भी जरूरी है। हमारा प्रयास है कि टेक्नोलॉजी को केवल रिकॉर्ड-कीपिंग तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे गवर्नेंस टूल बनाया जाए।


नरेन्द्र पाण्डेय : CSMCL की दुकानों में बारकोड स्कैनर्स और ब्लूटूथ प्रिंटर्स जैसी व्यवस्थाओं आम उपभोक्ता को इससे क्या फर्क पड़ेगा?

पदुम सिंह एल्मा : इसका सबसे बड़ा फायदा ट्रांजैक्शन को अधिक व्यवस्थित और ट्रेसेबल बनाना है। हम चाहते हैं कि रिटेल प्वाइंट पर बिलिंग और प्रोडक्ट इंफॉर्मेशन की प्रक्रिया अधिक स्टैंडर्डाइज्ड हो। टेक्नोलॉजी का फायदा तभी है जब उसका असर अंततः कस्टमर एक्सपीरियंस पर दिखाई दे।


नरेन्द्र पाण्डेय : कैश चेस्ट और लॉकर जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत क्यों पड़ी?

पदुम सिंह एल्मा : कैश मैनेजमेंट किसी भी बड़े रिटेल नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम चाहते हैं कि कैश हैंडलिंग में सिक्योरिटी और अकाउंटेबिलिटी दोनों मजबूत हों। कैश चेस्ट और लॉकर जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में हैं।

नरेन्द्र पाण्डेय : CSMCL को लेकर अतीत में कई तरह के विवाद और सवाल भी सामने आए हैं। क्या आपको लगता है कि नई तकनिकी इन पुराने मामलों का समाधान कर सकती है?

पदुम सिंह एल्मा : टेक्नोलॉजी निश्चित रूप से गवर्नेंस को मजबूत करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे अकेला समाधान नहीं कहा जा सकता। गवर्नेंस में क्लियर प्रोसेस, अप्रूवल्स, डॉक्यूमेंटेशन, ऑडिट, मोनिटरिंग और जिम्मेदारी—सभी जरूरी हैं। टेक्नोलॉजी इसमें प्रारंभिक चेतावनी सिस्टम की तरह काम कर सकती है।


नरेन्द्र पाण्डेय : एक बड़ा सवाल यह भी है कि शराब की बिक्री से सरकार को रेवेन्यु मिलता है, लेकिन इसके सामाजिक प्रभाव भी हैं?

पदुम सिंह एल्मा : यह एक संवेदनशील विषय है। हम मानते हैं कि कमर्शियल एक्टिविटी के साथ सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी की भावना भी होनी चाहिए। CSMCL का दायित्व रेगुलेटेड रिटेल व्यवस्था को संचालित करना है। लेकिन हम इस बात से भी अनभिज्ञ नहीं हैं कि शराब का सामाजिक प्रभाव होता है। इसलिए कानून और नियमन के पालन के साथ अवेयरनेस और रिस्पॉन्सिबल कंजम्पशन जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हैं। जहां जरूरत हो, वहां हेल्थ और डी- एडिक्ट्शन से जुड़े संस्थानों तथा संबंधित विभागों के साथ को-ओर्डिनेशन भी जरूरी है।


नरेन्द्र पाण्डेय : कई जगह शराब दुकानों के आसपास या मुख्य सड़कों पर ग्राहकों की भीड़ के कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार इसका असर आसपास के दुकानदारों और राहगीरों पर भी पड़ता है।

पदुम सिंह एल्मा : यह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण विषय है। शराब की दुकान केवल एक रिटेल प्वाइंट नहीं है, वह जिस लोकेशन पर है, वहां के ट्रैफिक और आसपास के लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी है। अगर किसी दुकान के कारण सड़क पर भीड़ बढ़ रही है या ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है, तो हमें इसे केवल ट्रैफिक पुलिस का विषय मानकर नहीं चलना चाहिए। संबंधित विभागों के साथ मिलकर इसका समाधान तलाशना जरूरी है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि दुकान की लोकेशन, प्रवेश और निकास की व्यवस्था, पार्किंग की स्थिति और ग्राहकों की भीड़—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाए।


इस बातचीत से इतना स्पष्ट है कि CSMCL अब सिर्फ शराब की बिक्री तक सीमित व्यवस्था नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, डेटा और बेहतर गवर्नेंस की ओर बढ़ता एक बड़ा सिस्टम है।
लेकिन असली बदलाव तब माना जाएगा, जब इसका असर स्टॉक से लेकर काउंटर तक और काउंटर से लेकर सड़क तक दिखाई दे। सही कीमत, पारदर्शी व्यवस्था, कम जाम और जवाबदेही—यही तय करेंगे कि यह बदलाव सिर्फ सिस्टम में आया है या सचमुच आम आदमी की जिंदगी में भी। क्योंकि आम आदमी को कीमत चाहिए, सड़क पर जाम नहीं और शिकायत पर सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए। CSMCL कितना स्मार्ट हो रहा है, यह उसके सिस्टम बताएंगे; लेकिन वह कितना जिम्मेदार है, इसका जवाब सड़क, दुकान और ग्राहक देगा।

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