सूप बोले तो ठीक, चलनी क्यों बोले?


नरेन्द्र पाण्डेय (लाईफ वर्सिटी ) : भारतीय लोकजीवन की कहावतें अक्सर समय के साथ और भी प्रासंगिक हो जाती हैं। “सूप बोले तो बोले, चलनी क्यों बोले जिसके हजारों छेद”—यह कहावत आज की राजनीति में नए अर्थ ग्रहण करती दिखाई देती है। विशेषकर जब बात चुनावों में धांधली या वोट चोरी के आरोपों की हो, तब यह कहावत सीधे तौर पर Indian National Congress पर लागू होती नजर आती है।

हाल के राजनीतिक विमर्श में जब चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो जाता है। ऐसे में यदि All India Trinamool Congress जैसी पार्टी, जिसका एक ठोस जनाधार रहा है और जो लंबे समय तक सत्ता में रही है, चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाती है—तो उसे एक राजनीतिक दृष्टिकोण के रूप में समझा जा सकता है। परंतु जब वही आरोप कांग्रेस की ओर से सामने आते हैं, तो सवाल केवल आरोपों का नहीं बल्कि विश्वसनीयता का भी बन जाता है।

कांग्रेस, जो कभी देश की सबसे प्रभावशाली पार्टी थी, आज कई राज्यों में अपना जनाधार खो चुकी है। कई जगहों पर संगठनात्मक ढांचा कमजोर है और चुनावी प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। ऐसे में जब वह चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, तो आलोचकों के लिए यह कहना आसान हो जाता है कि यह हार की हताशा है, न कि ठोस प्रमाणों पर आधारित आरोप।

यहाँ समस्या सिर्फ आरोप लगाने की नहीं है, बल्कि नैतिक आधार की भी है। राजनीति में आरोप लगाने से पहले आत्ममंथन आवश्यक होता है। अगर कोई दल खुद संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व संकट और जमीनी पकड़ के अभाव से जूझ रहा हो, तो उसके द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को जनता उतनी गंभीरता से नहीं लेती।

वर्तमान समय में भारतीय राजनीति में Bharatiya Janata Party का वर्चस्व बढ़ा है। ऐसे में विपक्ष की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। परंतु मजबूत विपक्ष वही बन सकता है, जो अपनी कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने का प्रयास करे—न कि हर हार के बाद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करे।

अंततः, लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाना एक गंभीर विषय है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि आरोप लगाने वाला पक्ष स्वयं भी निष्पक्षता और पारदर्शिता के मानकों पर खरा उतरे। वरना “चलनी” की स्थिति में खड़े होकर “सूप” पर उंगली उठाना जनता को स्वीकार्य नहीं होता।


VIEW MORE

Category News