नई दिल्ली : केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में एक जनवरी, 2025 तक कुल 1.09 लाख पद खाली थे, जबकि 72,689 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी साझा की। उन्होंने सीएपीएफ में स्वीकृत पदों, कुल क्षमता और रिक्तियों से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए। राय के अनुसार, इन बलों में स्वीकृत पदों की संख्या 2021 में 10,04,980 से बढ़कर एक जनवरी, 2025 तक 10,67,110 हो गई है। इसी अवधि में 1,09,868 पद रिक्त हैं। मंत्री से यह पूछा गया था कि क्या सीएपीएफ में भारी संख्या में पद रिक्त हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया ‘नहीं।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएपीएफ और असम राइफल्स में रिक्तियां सेवानिवृत्ति, इस्तीफे, पदोन्नति, मृत्यु, नयी बटालियनों का गठन तथा नए पदों के सृजन आदि के कारण उत्पन्न होती हैं और रिक्तियों को भरना एक निरंतर प्रक्रिया है। राय ने बताया कि यूपीएससी, एसएससी आदि के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय सक्रिय प्रयास कर रहा है।
उन्होंने बताया कि कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) के पदों पर जल्द भर्ती के लिए कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी सीएपीएफ और असम राइफल्स को नॉन जनरल ड्यूटी कैडर में खाली पदों पर समयबद्ध तरीके से कर्मियों की भर्ती करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई गई
वर्तमान में विभिन्न पदों के लिए 72,689 रिक्तियों की भर्ती के नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं, जो कि प्रक्रियाधीन हैं। राय ने कहा कि पदोन्नति रिक्तियों को भरने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की समय पर बैठकें, मेडिकल परीक्षा में लगने वाले समय में कमी और कांस्टेबल तथा जनरल ड्यूटी के लिए उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग के लिए कट-ऑफ अंकों को कम करना भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उठाए गए कुछ कदम हैं।
आपको बता दें कि बीते वर्ष एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया था। अब अभ्यर्थियों की शारीरिक मानक परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, डिटेल्ड मेडिकल एग्जामिनेशन व रिव्यू मेडिकल एग्जामिनेशन सब ( PET, PST, DV, Medical ) एक साथ आयोजित होते हैं। पहले यह अलग अलग होते थे। फिजिकल टेस्ट पास करने के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। भर्ती चक्र की अवधि को कम करने और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (एमएचए) ने यह फैसला लिया है।