माधवी लता की गोशामहल में बढ़ती सक्रियता ने बढ़ाए संकेत; BJP कई नेताओं को कर रही तैयार, राजा सिंह की वापसी पर पार्टी ने लगभग विराम लगा दिया है


हैदराबाद: तेलंगाना के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में अगला चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर चल रही खींचतान की परीक्षा भी बनता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) मौजूदा विधायक टी. राजा सिंह की वापसी की संभावना के बजाय अब इस सीट पर नए नेताओं को तैयार करने में जुटी है। पार्टी के भीतर के सूत्रों के मुताबिक, राज्य नेतृत्व की सार्वजनिक आलोचना के चलते राजा सिंह ने संगठन में अपना समर्थन लगभग खो दिया है।


हालांकि पार्टी की ओर से अभी अंतिम उम्मीदवार का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा नेता माधवी लता की गोशामहल में बढ़ती सक्रियता और राजा सिंह पर उनकी सीधी टिप्पणियां साफ संकेत दे रही हैं कि वह इस सीट से दावेदारी की तैयारी में हैं। राजनीति में कई बार टिकट घोषित होने से पहले ही गतिविधियां पोस्टर की तरह बहुत कुछ लिख देती हैं।


राजा सिंह ने पिछले साल भाजपा छोड़ दी थी। उन्होंने इसके पीछे कई कारण बताए थे, जिनमें पार्टी के मौजूदा नेतृत्व से असंतोष भी शामिल था। यह घटनाक्रम उस समय हुआ था, जब एन. रामचंदर राव को तेलंगाना भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। खास बात यह थी कि राजा सिंह खुद भी इस पद के दावेदार थे। बाद में उन्होंने दावा किया कि उन्हें नामांकन दाखिल न करने के लिए धमकाया गया था।


अब उनके रुख में एक और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। राजा सिंह ने पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जन सेना पार्टी (JSP) के तेलंगाना की राजनीति में प्रवेश का समर्थन किया है। यानी भाजपा से दूरी और JSP के प्रति झुकाव—दोनों संकेत एक ही दिशा में जाते नजर आ रहे हैं।


माधवी लता BJP की उम्मीदवार होंगी?


2024 के लोकसभा चुनाव में हैदराबाद सीट से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ चुनाव लड़ चुकीं माधवी लता पिछले कुछ समय से गोशामहल में लगातार स्थानीय लोगों से संपर्क कर रही हैं। इसी दौरान उन्होंने राजा सिंह की आलोचना भी की है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या राजा सिंह के भाजपा में लौटने की कोई संभावना है, तो पार्टी प्रवक्ता एन.वी. सुभाष ने Scg.in से कहा कि ऐसा नहीं होने वाला।

हालांकि, माधवी लता को ही अगला उम्मीदवार बनाए जाने पर उन्होंने सीधे तौर पर कोई पुष्टि नहीं की। सुभाष ने कहा कि पार्टी गोशामहल सीट के लिए कई नेताओं को तैयार कर रही है।

उन्होंने माना कि राजा सिंह की इस क्षेत्र में अपनी पकड़ है, लेकिन साथ ही कहा कि भाजपा के भीतर चुनाव लड़ने के इच्छुक कई लोग हैं और चूंकि सिंह अब पार्टी में नहीं हैं, इसलिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को तैयार कर रही है।

दूसरे शब्दों में, सीट वही है, इलाका वही है, लेकिन भाजपा की सूची में चेहरा बदलने की तैयारी दिखाई दे रही है।


MLA हैं, लेकिन BJP से बाहर


एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तेलंगाना विधानसभा में भाजपा के फ्लोर लीडर ने अब तक स्पीकर से राजा सिंह को गोशामहल विधायक पद से अयोग्य ठहराने की मांग नहीं की है। इसलिए सिंह अभी भी विधानसभा के सदस्य बने हुए हैं।

राजा सिंह का JSP के पक्ष में सार्वजनिक रुख भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि फिलहाल भाजपा में उनकी वापसी की राह आसान नहीं है। पार्टी नेतृत्व के साथ उनका टकराव कोई छिपी हुई बात नहीं है।


तेलंगाना भाजपा में हिंदुत्व के प्रमुख चेहरों में गिने जाने वाले राजा सिंह पहले भी विवादों में रहे हैं। 2022 में पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और करीब तीन महीने हिरासत में रहना पड़ा था। उनकी यह टिप्पणी हैदराबाद में कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के कार्यक्रम को राज्य सरकार की अनुमति दिए जाने के जवाब में आई थी।


निलंबन हुआ, फिर चुनाव से पहले खत्म भी


इन टिप्पणियों को लेकर भाजपा ने राजा सिंह को निलंबित कर दिया था। हालांकि 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका निलंबन वापस ले लिया गया।


अब राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजा सिंह अपनी सीट बचाए रखने के लिए JSP का रास्ता अपना सकते हैं। अगला चुनाव उनके लिए चार या पांच-कोणीय मुकाबला भी बन सकता है।


सवाल यह भी है कि अगर राजा सिंह निर्दलीय या किसी दूसरे दल के टिकट पर मैदान में उतरते हैं, तो कांग्रेस, BRS और BJP उनके खिलाफ कैसी रणनीति अपनाएंगे। गोशामहल की राजनीतिक जमीन फिलहाल किसी एक पार्टी की जागीर जैसी नहीं दिखती।


गौर करने वाली बात यह भी है कि 2014 में राजा सिंह के जीतने से पहले गोशामहल सीट कांग्रेस के दिवंगत नेता और पूर्व मंत्री एम. मुकेश गौड़ के पास थी।


BRS को अभी भी ‘घर वापसी’ की उम्मीद


दिलचस्प बात यह है कि हैदराबाद के कुछ BRS नेताओं को राजा सिंह और भाजपा के बीच मौजूदा दूरी उतनी स्थायी नहीं लगती। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि सिंह अभी भी विधायक हैं और यह अपने आप में बहुत कुछ बताता है।

उनका दावा है कि चुनाव नजदीक आने पर राजा सिंह भाजपा में वापस लौट सकते हैं। आखिर भारतीय राजनीति में चुनाव जितना करीब आता है, पुरानी नाराजगियों की उम्र उतनी ही तेजी से घटती दिखाई देती है।


बड़ी तस्वीर क्या है?


2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 119 में से आठ सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर करीब 14 प्रतिशत रहा था। राजा सिंह इन विजयी विधायकों में शामिल थे।


इससे भी अहम यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए तेलंगाना लगभग राजनीतिक बंजर जमीन जैसा था, तब भी गोशामहल से राजा सिंह अकेले भाजपा विधायक बने थे।


यही वजह है कि गोशामहल में भाजपा और राजा सिंह के बीच संभावित मुकाबला सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं होगा। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि व्यक्तिगत जनाधार संगठन से कितना बड़ा साबित होता है—और चुनावी गणित में आखिर किसकी चलती है।


मुख्य बात


फिलहाल संकेत यही हैं कि भाजपा गोशामहल में राजा सिंह की ‘घर वापसी’ के भरोसे बैठने के बजाय वैकल्पिक नेतृत्व तैयार कर रही है। माधवी लता की सक्रियता ने इस संभावना को और मजबूत किया है। लेकिन अंतिम उम्मीदवार और चुनावी समीकरण अभी तय नहीं हैं।


यानी फिलहाल कहानी का शीर्षक इतना ही है—राजा सिंह भाजपा से बाहर हैं, भाजपा उनकी सीट पर तैयारी में है, और चुनाव आने तक कौन किसके साथ खड़ा होगा, इस पर राजनीति ने अभी अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

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