राजधानी की सड़कों पर हर रोज़ बढ़ता जाम…
वनांचल के गांवों में अब भी नाव से नदी पार करते स्कूली बच्चे…
बस्तर में विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती…
इन्हीं सवालों के बीच छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने 1.72 लाख करोड़ रुपए का “संकल्प बजट” पेश किया है। दावा है—यह बजट केवल खर्च का खाका नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में निर्णायक कदम है। राजधानी रायपुर में फ्लाईओवर से लेकर अबूझमाड़ में एजुकेशन सिटी तक, किसानों से लेकर कर्मचारियों की कैशलेस इलाज योजना तक—सरकार ने हर वर्ग को साधने की कोशिश की है।
लेकिन क्या ये घोषणाएँ ज़मीन पर बदलाव बनेंगी?
क्या ट्रैफिक से जूझती राजधानी को सच में राहत मिलेगी?
और क्या बस्तर-सरगुजा विकास की नई कहानी लिख पाएंगे?
आइए, विस्तार से समझते हैं इस बजट की पूरी तस्वीर…
नरेन्द्र पाण्डेय (लाइफ वर्सिटी/SCG NEWS) : छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026–27 का 1.72 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इसे “संकल्प” की थीम से जोड़ा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में निर्णायक कदम बताया। लेकिन इस बजट की असली परीक्षा कागज़ से ज़मीन तक की दूरी में छिपी है।
यह बजट सिर्फ आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश, प्रशासनिक प्राथमिकता और विकास की रणनीति का दस्तावेज़ है।
राजधानी को ट्रैफिक से राहत: 9450 करोड़ की अधोसंरचना दृष्टि
रायपुर, जो प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र है, वहां ट्रैफिक अब रोज़मर्रा की चुनौती बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोक निर्माण विभाग के लिए लगभग 9450 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
प्रमुख शहरी परियोजनाएँ
मोवा–सेड़ीखेड़ी सड़क: 100 करोड़
लाभांडी–सड्डू मार्ग: 100 करोड़
भनपुरी चौक फ्लाईओवर: 20 करोड़
मोवा–दलदल सिवनी ब्रिज: 8 करोड़
शारदा चौक–तात्यापारा फ्लाईओवर: 10 करोड़
वीआईपी रोड, श्रीराम मंदिर के पास फुटओवर ब्रिज: 7 करोड़
अशोक रतन–कोया कचना वृहद पुल: 8 करोड़
इन परियोजनाओं का लक्ष्य सिर्फ यातायात सुगमता नहीं, बल्कि राजधानी की आर्थिक गति को बनाए रखना है। राजधानी पैकेज के तहत ट्रैफिक सुधार को प्राथमिकता देना यह संकेत देता है कि सरकार शहरी मतदाता और मध्यमवर्ग की असुविधाओं को राजनीतिक रूप से समझ रही है।
वनांचल से विकास के मार्ग तक
राज्य की भौगोलिक चुनौतियों—वन, नदी-नाले, पहाड़ी क्षेत्र—को देखते हुए 206 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जो अब तक समुचित कनेक्टिविटी से वंचित हैं। इनके लिए प्रारंभिक 50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
यह सिर्फ सड़क निर्माण नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन का प्रयास है।
बस्तर और सरगुजा: सुरक्षा से समृद्धि तक
साय सरकार ने बस्तर और सरगुजा को बजट का केंद्रीय फोकस बनाया है।
शिक्षा
अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी
स्कूल शिक्षा के लिए कुल बजट का 13.5% (लगभग 22 हजार करोड़)
स्वास्थ्य
कुनकुरी, मनेन्द्रगढ़, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज संचालन
कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज योजना
सिंचाई
इंद्रावती नदी पर देवरगांव और मटनार बैराज (2000 करोड़+)
कांकेर में मेढ़की बैराज (400 करोड़)
बीजापुर में मट्टीमारका डायवर्सन योजना (110 करोड़)
आजीविका
बकरी, सूअर और मधुमक्खी पालन हेतु 15 करोड़
एग्रो-फॉरेस्ट प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों के लिए 100 करोड़
यह संकेत है कि सरकार सुरक्षा-केन्द्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर विकास-केन्द्रित मॉडल स्थापित करना चाहती है।
पांच नए मिशन: नीति से परिणाम तक
मुख्यमंत्री ने पांच मिशनों की घोषणा की:
मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन
मुख्यमंत्री एआई मिशन
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन
मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन
मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन
एआई मिशन की घोषणा विशेष रूप से भविष्य-उन्मुख नीति का संकेत है। डिजिटल कनेक्टिविटी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर राज्य को मोड़ने की यह कोशिश है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
13,500 करोड़ कृषि क्षेत्र के लिए
3100 रुपए प्रति क्विंटल धान अंतर राशि भुगतान जारी
23 नए औद्योगिक पार्क (250 करोड़)
धान खरीदी की निरंतरता ग्रामीण राजनीतिक स्थिरता का आधार मानी जाती है।
विपक्ष का हमला और राजनीतिक विमर्श
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बजट को “झूठ का पुलिंदा” बताया। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इसे “शब्दों का मायाजाल” कहा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे “विनाश का बजट” करार दिया।
विपक्ष का मुख्य आरोप है:
35 हजार शिक्षकों की भर्ती पर स्पष्टता नहीं
युवाओं के लिए ठोस रोजगार योजना का अभाव
संविदा और बीएड अभ्यर्थियों की मांगों की अनदेखी
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह बजट विकास बनाम विश्वसनीयता की बहस को जन्म देता है।
सामाजिक सुरक्षा और शहरी योजनाएँ
18 वर्ष पूर्ण करने वाली बालिकाओं को 1.5 लाख सहायता
ई-वाहनों पर सब्सिडी
नवा रायपुर में राष्ट्रीय तीरंदाजी अकादमी
मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना (200 करोड़)
यह स्पष्ट है कि सरकार ग्रामीण आधार के साथ शहरी विस्तार को संतुलित करने का प्रयास कर रही है।
छत्तीसगढ़ के नवगठित राज्य के शुरुआती बजट जहां 5 हजार करोड़ के आसपास थे, वहीं आज यह 1.72 लाख करोड़ तक पहुँच चुका है। यह विस्तार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक परिपक्वता का भी संकेत है।
राजधानी में फ्लाईओवर, वनांचल में सड़क, बस्तर में एजुकेशन सिटी, कृषि में निवेश और डिजिटल मिशन—इन सबका सामूहिक अर्थ है कि सरकार विकास का व्यापक आख्यान गढ़ रही है।
लेकिन लोकतंत्र में हर बजट का अंतिम मूल्यांकन विधानसभा की तालियों से नहीं, बल्कि जनता की संतुष्टि से होता है।
अब सवाल यही है—
क्या ये फ्लाईओवर सिर्फ ट्रैफिक कम करेंगे, या शासन की विश्वसनीयता भी बढ़ाएँगे?
क्या बस्तर का बच्चा एजुकेशन सिटी तक पहुँचेगा?
क्या युवाओं को नौकरी का भरोसा मिलेगा?
“संकल्प” सिर्फ नारा बनकर रह जाता है या सच में छत्तीसगढ़ की दिशा और दशा दोनों बदलता है।