ACB समूह की कोयला वाशरियों की 1999 से जाँच की माँग, 18 अगस्त को दीपका-गेवरा में जन आंदोलन


.रवि कुमारअग्रवाल...(कोरबा)। भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने ACB समूह से जुड़ी कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और रेलवे साइडिंग से संबंधित गतिविधियों की वर्ष 1999 से वर्तमान तक जाँच की माँग उठाई है। पार्टी ने मामले में सीबीआई जाँच के साथ उच्चस्तरीय विशेष जाँच दल, बहु-विभागीय तकनीकी एवं वित्तीय जाँच तथा डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट कराने की माँग की है। इन माँगों को लेकर पार्टी की ओर से 18 अगस्त 2026 को दीपका-गेवरा क्षेत्र में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन एवं जन आंदोलन किए जाने की घोषणा की गई है।


पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष-संयोजक दीपक दुबे, उपाध्यक्ष विंदेश सिंह, महामंत्री संगठन संजय सिंह, महामंत्री प्रशासनिक शैलेन्द्र कुमार गोपाल, सचिव घनश्याम चंद्रा, अशोक जायसवाल, युवा मोर्चा संयोजक-अध्यक्ष संजय रत्नाकर, पप्पू सरदार तथा कोरबा जिला संयोजक दिनेश यादव की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मामला केवल किसी एक वाशरी या प्रदूषण की घटना तक सीमित नहीं है। पार्टी ने कोयला खरीद, वाशरी संचालन, कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले के परिवहन, कोयला लेखांकन, तौल कांटा, रेलवे साइडिंग, ताप विद्युत संयंत्रों में ईंधन उपयोग, राख एवं गाद निस्तारण, जल दोहन, डीजल-बायोडीजल, कर लाभ तथा डिजिटल अभिलेखों की पूरी श्रृंखला की जाँच की माँग की है।


क्षमता विस्तार और कोयले के वास्तविक हिसाब पर उठाए सवाल

पार्टी ने प्रत्येक वाशरी की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन अथवा कोयला प्रसंस्करण का वर्षवार मिलान कराने की माँग की है। साथ ही पर्यावरण स्वीकृति, सहमति पत्र, पर्यावरण प्रभाव आकलन, जनसुनवाई तथा जहाँ लागू हो वहां ग्रामसभा एवं पेसा प्रावधानों के अनुरूप क्षमता विस्तार हुआ या नहीं, इसकी जाँच की माँग की गई है।


प्रेस विज्ञप्ति में कच्चे कोयले से लेकर धुले कोयले, मध्यवर्ती उत्पाद, रिजेक्ट, गाद/सूक्ष्म कण, परिवहन और अंतिम भंडार तक पूरे कोयला प्रवाह का वैज्ञानिक हिसाब तैयार करने की माँग की गई है।


एक-एक टन कोयले के परिवहन का मिलान कराने की माँग

पार्टी का दावा है कि उपलब्ध अभिलेखों में बड़े पैमाने पर कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले के परिवहन का उल्लेख मिलता है। इसी आधार पर उसने खदान से वाशरी, वाशरी से रेलवे अथवा सड़क मार्ग और वहाँ से ताप विद्युत संयंत्र तक कोयले की पूरी श्रृंखला का स्वतंत्र मिलान कराने की माँग की है।


पार्टी ने माँग की है कि प्रत्येक परिवहनित मात्रा का स्रोत, वाशरी, प्रसंस्करण, रिजेक्ट उत्पादन, परिवहन, प्राप्तकर्ता और वास्तविक उपयोग का रिकॉर्ड से मिलान कर भौतिक सत्यापन कराया जाए।


‘रिजेक्ट कोयले’ के नाम पर संभावित विचलन की जाँच की माँग


प्रेस विज्ञप्ति में रिजेक्ट कोयले की गुणवत्ता, ऊष्मीय मान, नमूना परीक्षण, भंडारण, प्रेषण और अंतिम उपयोग की स्वतंत्र जाँच की माँग की गई है। पार्टी ने यह भी कहा है कि जाँच में इस पहलू को शामिल किया जाए कि कहीं उपयोगी कोयले को रिजेक्ट श्रेणी में दर्शाकर उसके उपयोग अथवा परिवहन में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।


तौल कांटा और डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जाँच


भारतीय जनाधिकार पार्टी ने तौल काँटा सर्वर, जीपीएस, फास्टैग, एएनपीआर, सीसीटीवी, आरएफआईडी, वाहन पंजी, रेलवे रेक, प्रेषण रिकॉर्ड तथा ईआरपी/एसएपी जैसे डिजिटल अभिलेखों की फोरेंसिक जाँच की माँग की है।


पार्टी के अनुसार जाँच में फर्जी वाहन, दोहरी प्रविष्टि, गलत तौल, काल्पनिक यात्राओं अथवा कोयले की मात्रा में संभावित हेरफेर जैसे पहलुओं का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।


नदी-नालों, भूजल और 10 किलोमीटर क्षेत्र के जनस्वास्थ्य की जाँच


पार्टी ने औद्योगिक इकाइयों द्वारा भूजल एवं सतही जल के दोहन, गाद एवं अपशिष्ट निस्तारण तथा नदी-नालों पर पड़ने वाले प्रभाव की स्वतंत्र वैज्ञानिक जाँच की माँग की है। विशेष रूप से खोलार नदी, अहिरन नदी और आसपास के नदी-नालों से नमूने लेकर स्वतंत्र मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से परीक्षण कराने की माँग की गई है।


इसके साथ ही वाशरियों, ताप विद्युत संयंत्रों, रेलवे साइडिंग और भारी कोयला परिवहन से प्रभावित लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में वायु, धूल, राख, शोर, भूजल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की माँग की गई है।


डीजल-बायोडीजल और कर लाभ की भी जाँच


पार्टी ने 1 जनवरी 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल/एचएसडी और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, टैंकर परिवहन तथा वाहनों में उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की माँग की है। अन्य राज्यों से बायोडीजल मंगाकर उपयोग किए जाने संबंधी शिकायतों की भी स्वतंत्र जाँच की माँग की गई है।


इसी अवधि में संबंधित कंपनियों को मिले कर छूट, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क में छूट तथा अन्य सरकारी लाभों का भी परीक्षण कराने की माँग की गई है।


श्रमिकों के अधिकार और विभागीय जवाबदेही भी जाँच के दायरे में


पार्टी ने वाशरी, परिवहन, रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत संयंत्रों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, दुर्घटना रिकॉर्ड और ठेका श्रम संबंधी अनुपालन की जाँच की माँग की है।


साथ ही एसईसीएल, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम, जल संसाधन सहित संबंधित नियामक विभागों द्वारा वर्षों के दौरान किए गए निरीक्षण और कार्यवाही की भी समीक्षा कर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की माँग की गई है।


18 अगस्त को दीपका-गेवरा में आंदोलन


पार्टी के अनुसार इन सभी माँगों को लेकर 18 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे ACB (India) Ltd. कार्यालय, SECL परिक्षेत्र, दीपका/गेवरा, जिला कोरबा के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन के माध्यम से सीबीआई तथा एसआईटी जाँच की माँग उठाई जाएगी।


पार्टी की प्रमुख माँगों में वर्ष 1999 से वर्तमान तक सीबीआई जाँच, एक-एक टन कोयले का हिसाब, रिजेक्ट कोयले की वास्तविक मात्रा एवं उपयोग की जाँच, क्षमता विस्तार और पर्यावरणीय/पेसा अनुपालन की जाँच, कोयला परिवहन एवं डिजिटल रिकॉर्ड का फोरेंसिक परीक्षण, नदी-नालों एवं भूजल की जाँच, 10 किलोमीटर क्षेत्र में जनस्वास्थ्य सर्वेक्षण, डीजल-बायोडीजल एवं कर लाभ की जाँच तथा श्रमिक अधिकारों की जाँच शामिल है।


पार्टी ने कहा है कि यदि जाँच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो नियमानुसार प्राथमिकी, वसूली, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और अभियोजन की कार्यवाही की जानी चाहिए।


भारतीय जनाधिकार पार्टी ने अपने संदेश में कहा है कि कोयला राष्ट्रीय संपदा, पानी जीवन का आधार और जंगल-जमीन आने वाली पीढ़ियों की विरासत है। पार्टी का कहना है कि इनके संरक्षण और जनस्वास्थ्य की कीमत पर किसी भी अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।


पार्टी का नारा है— “कोयला, पानी, जंगल, जमीन और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बंद करो—निष्पक्ष जाँच कराओ।”

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