शादी में लड़की की विदाई एवं रोना


लाईफ वर्सिटी (कहानी ) : एक जमाना था जब शादी में लड़की की विदाई के समय लड़की एवं परिवार जनो के रोने को देखकर कठोर दिल वाले भी रो देते थे। वर पक्ष वालों को भी लड़की के परिवारजनो के द्वारा विदाई के समय के रोने को देखकर यह एहसास हो जाता था कि जिस लड़की को हम ब्याह कर ला रहे हैं उसके परिवार में एवं परिवार वालों के बीच में कितना अपनापन एवं लगाव है।  लड़की की विदाई के समय परिवार वाले अपनी भावनाएं भी रोने के साथ साथ रोते रोते ही व्यक्त कर देते थे। 


एक बार एक लड़की की मां लड़की की विदाई के समय जोर-जोर से रो रही थी और कह रही थी 

हाय रे मेरी मैदे की लोई को कौआ ले गया 

लोगों को बात कुछ समझ में नही आई लड़की की विदाई के बाद लोगों ने जब लड़की की मां से पूछा कि आप यह क्या बोल रही थी तो उन्होंने बोला कि बेटी की शादी के पहले मैने अपने दामाद बाबू को देखा नही था।जब बारात आई तो पहली बार देखा। मेरी बेटी मैदे की लोई की तरह गोरी है एवं दामाद बाबू कौवे की तरह काले हैं। 

पहले मां बाप द्वारा घर द्वार परिवार देखकर ही रिश्ते किए जाते थे। लडकिया एवं लडके सहर्ष उन रिश्तों को स्वीकार भी कर लेते थे जो मां-बाप द्वारा तय किए गए थे, किंतु आज जमाना बदल गया है। आज लड़का हो या लड़की अपनी पसंद का जीवन साथी का चुनाव स्वयं करता है। मां बाप को इस जिम्मेदारी से छुट्टी प्रदान कर दी गई है। मां-बाप भी मजबूर हो जाते हैं आखिर में बच्चों की पसंद की शादी करने में समझौता कर लेते हैं 


शादी के पहले ही से आपस में बात करना एवं प्री वेडिंग शूटिंग से इतनी आत्मीयता हो जाती है कि लड़के और लड़कियों का शादी का संकोच एवं झिझक दूर हो जाती है। पहले लड़के एवं लड़कियों के लिए दोनों एक दूसरे के लिए अनजान रहते थे किंतु अब पहले से ही मेल मिलाप होने के कारण एक दूसरे को अच्छे से समझ जाते हैं। पंडितों द्वारा दोनों की कुडली में गुण एवं गण मिलाकर रिस्ता पक्का किया जाता है किंतु अब दोनों के गुण एवं अवगुण समान होने पर बिना कुंडली मिलाए शादी कर देते है।


इसका सामाजिक प्रभाव यह हुआ है की शादी के पहले ही लड़के लड़कियां आपस में इतनी बातें कर लेते हैं एवं इतनी बार मिलजुल लेते हैं उनकी संकोच एवं झिझक खत्म हो जाती है इस कारण से अपने मनपसंद जीवनसाथी से शादी करने के कारण शादी में विदाई के समय अब लड़कियां को रोना ही नहीं आता है। 

एक तरफ वह प्रेमी भी है जो एक तरफा प्यार करता है। लड़की की विदाई के समय अंदर ही अंदर रोता है, मन ही मन में रोता है। उसकी तो दुनिया ही लुट जाती है न जाने कितने सपने देखे थे उसने सब चूर-चूर हो जाते हैं जब दूसरा कोई आकर उसकी मोहब्बत को ले जाता है, आखिर में रोना ही उसके नसीब में रह जाता है। 


आंसू न बहा फरियाद न कर दिल जलता है तो जलने दे


एक मान्यता है की शादी में विदाई के समय लडकी एवं परिवार वाले जितना अधिक रोते थे लड़की का दांपत्य जीवन उतना ही सुखी रहता था। भविष्य में उनके दिन हंसी खुशी से ही गुजरते थे। जो लड़की शादी में विदाई के समय अपना रोने का कोटा (टारगेट) पूरा नहीं करती थी उन्हें शादी के बाद किसी न किसी रूप में रोना ही पड़ता है जैसे जीवनसाथी से अनबन, वैचारिक मतभेद, तलाक की नौबत। 

इस तरह विदाई मैं रोने की रस्म की अनिवार्यता को देखते हुए जिस तरह गाने बजाने में संगीत में कोरियोग्राफर की मदद ली जाती है उसी तरह अब कोरियोग्राफर लड़कियों को रोने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं एवं ब्यूटीपार्लर वाले भी उसी तरह का मेकअप करते है। 


किस तरह रोना है, कैसा एक्शन करना है, सुबुक सुबुक कर रोना, कितनी देर तक रोना है। मेकअप जिस हिसाब से है उस हिसाब से आंसू कितने निकालना है जिससे कि मेकअप खराब ना हो एवं फोटो भी ठीक आए, यही सब बातें लड़की से ब्यूटी पार्लर में जब मेकअप के लिए जाती है तब भी पूछा जाता है कि आप किस हिसाब से रोयेगी, ज्यादा रोएगी, कम रोयेगी, आंसू के साथ या बिना आंसू के, ओरिजिनल रोना आएगा कि आर्टिफिशियल रोना है। उसी हिसाब से मेकअप किया जाता है। यदि रोना ज्यादा आता है और रोने की एक्टिंग ज्यादा करना है तो स्टील मेकअप किया जाता है जो आंसुओं से खराब नहीं होता है यह सब ट्रेनिंग आज कोरियोग्राफर लड़कियों को दे रहे हैं।


घूंघट के पट खोल रे तोहे पिया मिलेंगे
 अब यह झंझट भी खत्म हो गई है। पिया पहले ही मिल गया है अब घूंघट की जरूरत ही नहीं रही।
आज विदाई के बाद लड़कियां कार में बैठकर बाय-बाय करते हुए निकल जाती है। 


ले जाएंगे ले जाएंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे।


विदाई के बाद रोने वालों में कुछ महत्वपूर्ण लोग वह भी है जो वास्तव में दुखी है एवं मन से रोते हैं जिन्होंने शादी के समय अपना तन मन धन लगाकर सहयोग किया था और शादी के बाद भुगतान नहीं होने पर रो रो के पैसे मांगने पड़ते हैं।

 आज जमाना बदल गया है रिसेप्शन में भी लड़की लड़कियां बिना किसी संकोच आपस में हंसी मजाक करते हुए नजर आते है है स्टेज पर जो भी मिलने आता है या आशीर्वाद देने आता है उनके पैर पढ़ना तो दूर रहा अब हाथ मिलाना एवं गले मिलने की परंपरा चालू हो गई है


आज शादी में विदाई में रोने का कोटा पूरा करने के लिए बनावटी रूप से रोने के लिए मैंने भी कैसे रोया जाता है इस संबंध में ट्रेनिंग देना शुरू किया है। विदाई के समय दहाड मारमार के रोना, रोते-रोते बेहोश हो जाना, बिना रोए आसु का निकल जाना, इस संबंध में जिस किसी को भी मेरी आवश्यकता हो तो कृपया संपर्क करे।



शिवशंकर गुप्ता, 

मोबाइल नंबर 9406404021,

9827403889

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