2022 पैगंबर मोहम्मद टिप्पणी मामले में टी राजा सिंह बरी, अदालत ने जांच में खामियों को बताया वजह


हैदराबाद: 2022 में पैगंबर मोहम्मद और इस्लाम को लेकर की गई विवादित टिप्पणियों से जुड़े मामले में गोशामहल विधायक टी राजा सिंह को विशेष एमपी/एमएलए अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले के पीछे अदालत ने जांच प्रक्रिया और साक्ष्यों में कई कमियों का हवाला दिया है। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि चार वर्षों तक चली कार्यवाही के दौरान जांच अधिकारियों की ओर से कई विसंगतियां सामने आईं, जिसके कारण अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका।


यह मामला 22 अगस्त 2022 को टी राजा सिंह द्वारा अपने यूट्यूब चैनल ‘श्री राम चैनल तेलंगाना’ पर अपलोड किए गए लगभग 10 मिनट लंबे वीडियो से जुड़ा है। वीडियो का शीर्षक “फारूकी के आका का इतिहास सुनिए” था।


वीडियो में राजा सिंह ने पैगंबर मोहम्मद के विवाहों का उल्लेख किया था। उन्होंने कुरान को “हरा किताब” कहा और मुसलमानों के लिए “गोल टोपी वाले” शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही उन्होंने गाय वध को लेकर भी टिप्पणी की थी और कहा था कि गाय की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर क्षत्रिय समुदाय हिंसा का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेगा।

वीडियो में उन्होंने कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी पर भी निशाना साधा था। उन्होंने फारूकी को इस्लाम में निषिद्ध मांस खाने की सलाह दी थी और उनकी मां तथा 2002 के गुजरात दंगों के दौरान परिवार की परिस्थितियों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। वीडियो के अंत में उन्होंने इसे “कॉमेडी” बताया था।


वीडियो सामने आने के बाद हैदराबाद के पुराने शहर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। शालीबंदा समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में एक सब-इंस्पेक्टर सहित कई लोग घायल हुए। कई बाजारों में दुकानें बंद रहीं और राजा सिंह के पुतले भी जलाए गए।

उस समय भारतीय जनता पार्टी के विधायक रहे राजा सिंह को पार्टी ने तत्काल निलंबित कर दिया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153(ए), 295(ए), 504, 505 और 506 के तहत मामले दर्ज किए गए।


23 अगस्त 2022 को उन्हें प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह 25 अगस्त 2022 से 9 नवंबर 2022 तक चेरलापल्ली केंद्रीय कारागार में रहे। बाद में उन्हें जमानत मिली। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि गिरफ्तारी के दौरान हैदराबाद पुलिस ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया था।


इस पूरे प्रकरण में हैदराबाद और साइबराबाद पुलिस ने राजा सिंह के खिलाफ कुल आठ मामले दर्ज किए थे।


अपने फैसले में अदालत ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद के विवाहों को लेकर राजा सिंह द्वारा किए गए संदर्भ धार्मिक स्रोतों में वर्णित सामग्री से मेल खाते हैं। अदालत ने सहीह अल-बुखारी और सूरह अल-अहजाब के कुछ संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि संबंधित बातें धार्मिक ग्रंथों में मौजूद हैं। इसलिए इन टिप्पणियों को धार्मिक भावनाएं आहत करने के उद्देश्य से की गई “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण” टिप्पणी नहीं माना जा सकता।


“हरा किताब” टिप्पणी पर अदालत ने कहा कि हरे रंग की किताबें सामान्य रूप से देखी जाती हैं। ऐसे में यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि यह टिप्पणी विशेष रूप से कुरान का अपमान करने के इरादे से की गई थी।


“गोल टोपी वाले” शब्द के इस्तेमाल पर अदालत का कहना था कि मुसलमानों को आमतौर पर स्कल कैप पहने देखा जाता है। इसलिए केवल इस आधार पर यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने समुदाय को निशाना बनाने के लिए यह टिप्पणी की थी।


अदालत ने यह भी नोट किया कि जांच अधिकारी ने स्वीकार किया था कि आरोपपत्र दाखिल करने से पहले उन्होंने यह सत्यापित नहीं किया कि संबंधित टिप्पणियां किसी मान्य धार्मिक स्रोत पर आधारित थीं या नहीं। वहीं अभियोजन पक्ष के फोरेंसिक विशेषज्ञ ने भी वीडियो साक्ष्य में कुछ असंगतियों तथा उसकी कस्टडी चेन में खामियों की ओर संकेत किया था।


फैसले में दस्तावेजी और प्रक्रियागत कमियों का भी उल्लेख किया गया। अदालत के अनुसार, जिस मोबाइल फोन पर मूल वीडियो देखा गया था उसे जांच एजेंसियों ने जब्त नहीं किया। इसके अलावा भाषण का अनुवाद ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया था जिसके पास औपचारिक अनुवाद संबंधी योग्यता नहीं थी। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि इसे अंतिम और निर्विवाद सत्य नहीं माना जा सकता।


इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने टी राजा सिंह को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। साथ ही अदालत ने पुलिस को निष्पक्ष और संतुलित जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को अपने संसाधन वास्तविक अपराधियों पर केंद्रित करने चाहिए और पक्षपातपूर्ण या निराधार शिकायतों पर समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

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