जिसे हम प्यार समझते हैं, क्या वह हमेशा प्यार ही होता है? या कभी-कभी वही रिश्ता मोह, जरूरत और डर में बदल जाता है?
चंद्रमा और रोहिणी की कहानी के बहाने समझिए—हमारा मन किसी एक व्यक्ति से इतना क्यों जुड़ जाता है, और प्यार कब आसक्ति बन जाता है?
शायद सबसे बड़ा सवाल यही है—
आप उसे चाहते हैं… या उसके बिना रह नहीं सकते?