भारत में AI इंजीनियरिंग नौकरियों में 51% बढ़ोतरी, विजयवाड़ा में सबसे तेज ग्रोथ: LinkedIn India Head


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नौकरियों को लेकर चर्चा अक्सर इस सवाल से शुरू होती है कि क्या AI इंसानों की नौकरियां खत्म कर देगा। लेकिन LinkedIn India के कंट्री हेड कुमारेश पट्टाभिरामन के मुताबिक इससे भी अहम सवाल यह है कि AI के दौर में बचने और पैदा होने वाली नौकरियों का स्वरूप कैसा होगा।


Business Today के ‘India at 100: India’s Manufacturing Champions’ कार्यक्रम में हुई बातचीत के दौरान पट्टाभिरामन ने AI के दौर में मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि AI से जुड़े नए रोल तेजी से सामने आ रहे हैं और इसके साथ ही कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया और जरूरी स्किल्स भी बदल रही हैं।


LinkedIn के साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2023 से अब तक दुनियाभर में AI से जुड़ी 20 लाख नई नौकरियां जुड़ी हैं। इनमें 3.11 लाख नौकरियां भारत में हैं। भारत में अकेले AI इंजीनियरिंग से जुड़े रोल पिछले एक साल में 51% बढ़े हैं।


AI नौकरियों का तेजी से विस्तार


पट्टाभिरामन ने कहा कि मोबाइल, पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी पिछली टेक्नोलॉजी वेव्स के मुकाबले AI के फैलने की गति काफी तेज है।


उन्होंने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों तक AI की पहुंच उस समय की तुलना में कहीं तेजी से हो रही है, जब इंटरनेट, मोबाइल या PC जैसी तकनीकें वहां पहुंची थीं।


रोजगार के आंकड़ों में भी इस बदलाव का असर दिखाई दे रहा है। कुछ मौजूदा नौकरियों के कार्य AI के जरिए ऑटोमेट हो सकते हैं, जबकि कई अन्य काम AI की मदद से और बेहतर किए जा सकते हैं। इसके साथ ही ऐसी क्षमताओं की अहमियत बढ़ सकती है जिन्हें इंसान विशिष्ट रूप से बेहतर तरीके से करते हैं।


पट्टाभिरामन के मुताबिक, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों को इस तेज बदलाव के लिए तैयार करना है। इसके लिए लगातार यह समझना जरूरी होगा कि कौन-सी स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।


विजयवाड़ा बना AI नौकरियों का नया केंद्र


AI से जुड़ी नौकरियों का विस्तार अब सिर्फ बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे पारंपरिक टेक हब तक सीमित नहीं है।

LinkedIn के कार्यक्रम में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, विजयवाड़ा में केवल एक साल में AI इंजीनियरिंग से जुड़े रोल में 46% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।


पट्टाभिरामन ने विजयवाड़ा के इस उभरते AI इंजीनियरिंग हब बनने को अप्रत्याशित बदलाव बताया।


AI टूल्स और सीखने के संसाधनों तक आसान पहुंच इस बदलाव को गति दे रही है। LinkedIn के आंकड़ों के मुताबिक, इस पीढ़ी के प्रोफेशनल्स वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी गति से सीख रहे हैं और LinkedIn Learning पर वैश्विक औसत से 50% अधिक समय बिता रहे हैं।


टियर-2 और टियर-3 शहरों के छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि AI करियर के अवसर अब केवल उनके शहर या भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं रहेंगे।


इन तीन AI नौकरियों पर नजर


AI से जुड़े कई नए जॉब रोल पहले ही सामने आ चुके हैं। युवाओं के लिए उभरते अवसरों के बारे में पूछे जाने पर पट्टाभिरामन ने तीन भूमिकाओं का उल्लेख किया:


  • Generative AI Engineer
  • AI Practitioner
  • Prompt Engineer


हालांकि, उनके मुताबिक बड़ा बदलाव उन नौकरियों में भी हो रहा है जिनके जॉब टाइटल अभी नहीं बदले हैं।


मिसाल के तौर पर, सोशल मीडिया मैनेजर का पदनाम वही रह सकता है, लेकिन उस भूमिका के लिए जरूरी स्किल्स में बड़ा बदलाव आ चुका है। अब ऐसे प्रोफेशनल्स से AI आधारित कंटेंट टूल्स के साथ काम करने की क्षमता की उम्मीद बढ़ रही है।


पट्टाभिरामन की सलाह है कि युवा प्रोफेशनल्स को किसी ऐसे समस्या-क्षेत्र की पहचान करनी चाहिए जिसे वे हल करना चाहते हैं और AI स्किल्स को उन क्षमताओं के साथ जोड़ना चाहिए जो अभी भी विशिष्ट रूप से मानवीय हैं।


अब सिर्फ डिग्री काफी नहीं हो सकती


AI की वजह से भर्ती प्रक्रिया भी बदल रही है।

AI एजेंट्स की मदद से उम्मीदवार बड़ी संख्या में नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में कुछ ही घंटों में रिक्रूटर्स के पास सैकड़ों या हजारों आवेदन पहुंच सकते हैं। पट्टाभिरामन के मुताबिक, इससे केवल रिज्यूमे के आधार पर उम्मीदवारों के बीच अंतर करना मुश्किल होता जा रहा है।


LinkedIn के उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अब 46% रिक्रूटर्स भर्ती संबंधी फैसलों में स्किल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।


इसका मतलब है कि उम्मीदवारों से केवल अपनी स्किल्स या योग्यता की सूची देने के बजाय यह दिखाने की अपेक्षा बढ़ रही है कि वे वास्तव में क्या कर सकते हैं।


पट्टाभिरामन ने कहा, “सिर्फ मेरी बात या किसी एजेंट की बात पर मेरी स्किल्स पर भरोसा मत कीजिए। मुझे करके दिखाइए।”

इस बदलाव के बीच वास्तविक काम का पोर्टफोलियो प्रोफेशनल्स के लिए और महत्वपूर्ण हो सकता है। अब इसका महत्व केवल डिजाइनर्स और आर्किटेक्ट्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नॉलेज-बेस्ड जॉब्स में भी बढ़ सकता है।


अगली पीढ़ी के पास दोगुनी नौकरियां हो सकती हैं


भविष्य का वर्कफोर्स केवल कम नौकरियों का नहीं, बल्कि लगातार बदलते और बड़े जॉब मार्केट का हो सकता है।

पट्टाभिरामन के मुताबिक, अगले दशक में वर्कफोर्स में प्रवेश करने वाली पीढ़ी के पास पिछली पीढ़ी की तुलना में दोगुनी संख्या में नौकरियां हो सकती हैं।


इसी के साथ LinkedIn का अनुमान है कि 2030 तक भारत में 75% जॉब स्किल्स बदल जाएंगी।

ऐसे में तकनीकी विशेषज्ञता के साथ तेजी से खुद को बदलने और नई चीजें सीखने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

उन्होंने कहा, “स्किल्स एक फैक्टर हैं। इसलिए उम्र चाहे जो भी हो, तेजी से काम करने के नए तरीकों को अपनाने की क्षमता इस समय सबसे ज्यादा मायने रखती है।”


22 साल की उम्र में करियर शुरू करने वाले युवा के लिए उनकी सलाह किसी एक जॉब टाइटल को चुनने के बजाय ऐसी समस्या चुनने की है जिसे वह हल करना चाहता है और AI को मानवीय निर्णय क्षमता के साथ जोड़ना सीखना है।


भारत का AI फायदा सिर्फ इंजीनियरों तक सीमित नहीं


पट्टाभिरामन के मुताबिक, AI के क्षेत्र में भारत का अवसर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिभा तैयार करने की उसकी क्षमता से भी जुड़ा है।


उन्होंने भारत में LinkedIn के विकास का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्षों तक इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशंस तैयार करने के बाद अब कंपनी की दो प्रोडक्ट लाइन्स पूरी तरह भारत से विकसित की जा रही हैं। इनमें इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट मैनेजमेंट, डिजाइन, डेटा साइंस और मार्केटिंग की टीमें शामिल हैं।


उन्होंने इसे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के बढ़ते विस्तार से भी जोड़ा, जहां कंपनियां भारत में केवल अलग-अलग काम आउटसोर्स करने के बजाय पूरी बिजनेस क्षमताएं विकसित कर रही हैं।


पट्टाभिरामन ने कहा, “भारत के पास शानदार अवसर है, लेकिन हमें इसे अभी हासिल करना होगा।”

भारत के मैन्युफैक्चरिंग वर्कफोर्स के लिए AI ट्रांजिशन का संदेश यही हो सकता है कि सबसे सुरक्षित नौकरी जरूरी नहीं कि वह हो जिसे AI छू नहीं सकता। हो सकता है कि सबसे सुरक्षित वही नौकरी हो, जिसमें काम करने वाला व्यक्ति AI के साथ बदलने के लिए पर्याप्त तेजी से नई चीजें सीख सके।

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