भोपाल :
जब पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न मना रहा था, तब मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह के एक विवादित बयान ने पूरे माहौल को झकझोर कर रख दिया। सेना की बहादुरी की प्रतीक बनीं कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी अब न केवल सियासी विवाद बन चुकी है, बल्कि यह मामला हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
ऑपरेशन सिंदूर: सफलता की गूंज, विवाद की शुरुआत
भारतीय सेना द्वारा दुश्मन के खिलाफ की गई रणनीतिक सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी जब कर्नल सोफिया कुरैशी ने प्रेस को दी, तो देशभर में सेना के अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल की तारीफ होने लगी। लेकिन इसी बीच, मध्यप्रदेश के महू में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मंत्री विजय शाह ने जो टिप्पणी की, उसने न केवल सेना का अपमान किया बल्कि महिला गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा,
"जिन्होंने हमारी बहनों के सिंदूर उजाड़े थे, उन लोगों को हमने उन्हीं की बहन भेजकर उनकी ऐसी की तैसी करवाई।"
बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला, और देखते ही देखते यह एक राष्ट्रीय विवाद में तब्दील हो गया।
हाई कोर्ट का सख्त रुख: चार घंटे में FIR का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस बयान को सेना और महिलाओं के सम्मान के खिलाफ मानते हुए पुलिस को चार घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने एफआईआर की प्रारंभिक ड्राफ्टिंग पर भी सवाल उठाए और कहा कि,
"ऐसे गंभीर मामलों में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
विपक्ष का हमला-
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने विजय शाह के बयान को लेकर बीजेपी पर सीधा हमला बोला।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा,
"यह न सिर्फ सेना बल्कि हर भारतीय महिला का अपमान है। विजय शाह को तुरंत मंत्री पद से हटाया जाना चाहिए।"
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन किए और मुख्यमंत्री से मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की।
दिलचस्प बात यह रही कि बीजेपी के भीतर भी इस बयान को लेकर मतभेद उभर आए। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस टिप्पणी की सार्वजनिक रूप से आलोचना की और मंत्री को हटाने की मांग की। सूत्रों की मानें तो पार्टी ने विजय शाह से इस्तीफा देने को कहा था, लेकिन जब उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सिर्फ मंत्री पद नहीं, बल्कि विधायक पद से भी इस्तीफा देंगे, तब पार्टी ने कदम पीछे खींच लिए। शाह का आदिवासी समुदाय से होना और राज्य में 47 आरक्षित सीटों का समीकरण इस फैसले की पृष्ठभूमि में रहा।
सुप्रीम कोर्ट में फटकार, SIT जांच के आदेश-
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ विजय शाह जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी माफी याचिका खारिज करते हुए कहा,
"आप एक मंत्री हैं, आपको अपने शब्दों की गरिमा समझनी चाहिए।"
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया, जिसमें एक महिला IPS अधिकारी भी शामिल होंगी। SIT को 28 मई तक जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
बीजेपी की ‘वेट एंड वॉच’ नीति पर सवाल
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बयान जारी कर कहा,
"मामले की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है, उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।"
हालांकि, पार्टी की यह ‘वेट एंड वॉच’ नीति अब सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक पूछा जा रहा है कि जब सेना और महिलाओं के सम्मान पर सार्वजनिक टिप्पणी की गई है, तब भी विजय शाह मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं?
क्या विजय शाह देंगे इस्तीफा?
फिलहाल, इस सवाल का जवाब हवा में है। बीजेपी अंदरखाने इस मुद्दे को ‘डैमेज कंट्रोल’ की दिशा में देख रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही अगला कदम तय होगा। सवाल अब सिर्फ बयान का नहीं, बल्कि नैतिकता, जवाबदेही और संवैधानिक जिम्मेदारियों का है।
विजय शाह का बयान न केवल एक राजनीतिक गलती थी, बल्कि यह उस सेना का भी अपमान था, जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने को तैयार रहती है। कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई टिप्पणी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सत्ता की ऊंचाई पर बैठे लोगों की जुबान जब मर्यादा लांघती है, तो उसका असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहता—वो राष्ट्रीय चरित्र को भी चोट पहुंचाता है।
अब पूरा देश देख रहा है कि क्या विजय शाह इस्तीफा देंगे, या बीजेपी राजनीतिक समीकरणों के आगे नैतिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर देगी।