एससीजी न्यूज, नरेंद्र पाण्डेय :
2025 में जब दुनिया
चंद्रयान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात कर रही थी, भारत का एक कोना ऐसा भी था जहां अब भी बंदूकें
बोली जाती थीं। पर अब नहीं। अबूझमाड़, बीजापुर, कर्रेगुट्टा, गढ़चिरौली — जिनके नाम कभी AK-47 की धमक से गूंजते थे, अब वहां सिलाई मशीनों की टक-टक, मोटरसाइकिल गश्त की गरज और जनचौपालों में गूंजती
उम्मीदें हैं।
नक्सलवाद: अब फाइल नहीं, फील्ड का
विषय
छत्तीसगढ़ सरकार की ‘सॉफ्ट हार्ट, हार्ड हैंड’ नीति अब सिर्फ सियासी जुमला नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बन चुकी है। अबूझमाड़ के घने
जंगलों में 27 नक्सली ढेर, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में C-60 कमांडो की कार्रवाई में चार हार्डकोर खत्म, और सबसे बड़ी बात – 24 इनामी माओवादी आत्मसमर्पण। इन सबके बीच मुख्यमंत्री
विष्णुदेव साय का बयान: “31 मार्च 2026 तक अबूझमाड़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त और विकसित
कर देंगे।” यह वादा नहीं, विज़न है — जो
बासिंग BSF कैंप में ज़मीन
पर जवानों के साथ बैठकर खाए गए भोजन, 200 मोटरसाइकिलों की सौगात और महिला कमांडोज़ के चेहरों की चमक
में दिखाई देता है।
जब बसवराजु गिरा, माओवाद की
रीढ़ टूटी
15 घंटे की पैदल
यात्रा, 32 किलोमीटर जंगल
पार कर, DRG और BSF ने जिस ‘गुरिल्ला भूत’ को ढेर किया, वह सिर्फ एक मुठभेड़ नहीं थी — यह नक्सलवाद के “आइकॉन” का
अंत था। बसवराजु उर्फ नंबाला केशव राव, जिसे माओवादी विचारधारा की आत्मा कहा जाता था, अब इतिहास है। यह ऑपरेशन सिर्फ टेक्टिकल नहीं था, यह सैद्धांतिक था — अब विचारधारा नहीं, विकास बोलेगा।

बसवराजु की मौत के बाद जो हुआ, वह एक डोमिनो इफेक्ट जैसा था। राकेश जैसे इनामी डिप्टी कमांडर समेत 24 नक्सलियों का सरेंडर — न केवल सुरक्षा तंत्र की
जीत, बल्कि मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर सरकार की श्रेष्ठता थी।
ये वही लोग थे जो
- फायरिंग
- IED ब्लास्ट
- हत्या
- और आगजनी
जैसे केसों में शामिल थे।
अब उनके हाथों में बंदूक नहीं, उम्मीदों की थैली है। और सरकार ने हर
आत्मसमर्पणकर्ता को ₹50,000 प्रोत्साहन
देकर बता दिया — अब युद्ध बंदूक से नहीं, भरोसे से लड़ा जाएगा।
“पहली बार कोई मुख्यमंत्री हमारे बीच आया है।”
तो यह वाक्य सुरक्षा बलों की मनोदशा का आईना था। अब सरकार
केवल नक्सलियों से नहीं लड़ रही, वह नक्सल प्रभावित
नागरिकों के विश्वास के लिए भी संघर्ष कर रही है। मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित जनचौपाल में माहेश्वरी
नाम की महिला ने कहा — “महतारी वंदन
योजना से सिलाई मशीन ली, अब ₹5000 महीना कमा रही हूं।” यह
संवाद AK-47 से आगे के युग
की शुरुआत है।
C-60 का कड़ा जवाब
गढ़चिरौली में DIG अंकित गोयल के नेतृत्व में C-60 कमांडो की कार्रवाई ने चार हार्डकोर नक्सलियों को खत्म किया। भारी मात्रा में हथियार
जब्त, सघन सर्च
ऑपरेशन — यह सब दिखाता है कि छत्तीसगढ़ हो या महाराष्ट्र, अब एकजुट स्टेट स्ट्राइक हो रही है। 2025 में नक्सलवाद पर हुए हमलों की बानगी दें तो ये संख्या
सियासी भाषण नहीं, ठोस धरातल है:
- 227 आत्मसमर्पण
- 237 गिरफ्तार
- 119 मुठभेड़
में ढेर
यह आंकड़े कहते हैं — अब डर नहीं, डेटा सरकार के साथ खड़ा है।
‘सरेंडर या सर्जिकल’: नई नीति का
नाम
अबूझमाड़, बीजापुर, कर्रेगुट्टा —
हर जगह यही संदेश गया है कि या तो आत्मसमर्पण करो, या स्टील के वार के लिए तैयार रहो। अब यह सिर्फ
सुरक्षा नीति नहीं, राजनीतिक
इच्छाशक्ति का सार्वजनिक ऐलान है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह दौरा प्रचार नहीं, परिवर्तन की पराकाष्ठा है। अब अबूझमाड़ से बस्तर
तक — एक नई गाथा लिखी जा रही है यह गाथा गोलियों से नहीं, गांवों से लिखी जा रही है। यह सिर्फ एक
राज्य की नहीं, राष्ट्र की
चेतना का पुनर्जागरण है। अबूझमाड़ की महिलाएं, बस्तर के जवान, गढ़चिरौली के खेत — सब कह रहे हैं: “अब बंदूक नहीं, भरोसा चाहिए। लाल नहीं, हरियाली चाहिए। और जंगल नहीं, जिंदगी चाहिए।”