INDIA गठबंधन का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जन महाभियोग', राहुल गांधी बोले- अब पद पर नहीं रहेंगे


नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन ने शनिवार को दिल्ली में 'जन महाभियोग' का प्रस्ताव पारित कर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित मॉक संसद में लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी सांसदों, सामाजिक संगठनों और नागरिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं और कथित वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि खड़गे के आवास पर आयोजित यह जन महाभियोग संसद की औपचारिक कार्यवाही या संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष का प्रतीकात्मक राजनीतिक विरोध है, जिसके माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपने आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की।

राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अब पद छोड़ना होगा

राहुल गांधी का आरोप- 13.3 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए

जन महाभियोग की चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि देश में 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जबकि इन मतदाताओं ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान किया था।

राहुल गांधी ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत का अंतर करीब 3 प्रतिशत रहा। ऐसे में यदि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, तो यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों पर साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास पर्याप्त सबूत हैं और ज्ञानेश कुमार अब मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने नहीं रहेंगे।

राहुल गांधी ने इस आयोजन को केवल राजनीतिक बैठक नहीं, बल्कि कथित वोट चोरी में शामिल लोगों के खिलाफ राजनीतिक हथियार बताया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ इंडिया गठबंधन के 'जन महाभियोग' में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे

खड़गे ने पीएम मोदी और अमित शाह पर लगाए आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि करीब सात महीने पहले 193 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस दिया था, लेकिन उन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया गया।

खड़गे ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बिहार में इसका पहला प्रयोग हुआ और बाद में इसे देशभर में विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाने के उद्देश्य से लागू किया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष मृत मतदाताओं के नाम हटाने का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन पुनरीक्षण के नाम पर वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।


विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग को घेरा

समाजवादी पार्टी के नेता हरेंद्र मलिक ने SIR प्रक्रिया को वोट फिक्सिंग का ब्लूप्रिंट बताते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए गए हैं।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद वैद्यनाथ राम ने कहा कि SIR के नाम पर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के सांसद अभय कुशवाहा ने बिहार में करीब 47 लाख और देशभर में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने भी जन महाभियोग का समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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रामलीला मैदान में आज शक्ति प्रदर्शन

INDIA गठबंधन ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के विरोध में 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

यह कार्यक्रम पहले शुक्रवार को प्रस्तावित था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के कारण इसे शनिवार के लिए टाल दिया गया था।


लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर बहस तेज

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का यह अभियान अब केवल SIR प्रक्रिया के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची की शुद्धता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे बड़े सवाल आ गए हैं।

हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि तथा उनके कारणों का परीक्षण भी जरूरी है। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर पक्ष और आधिकारिक आंकड़े सामने आना इस बहस को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

सवाल यह है कि क्या विपक्ष के आरोप चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में किसी गंभीर खामी की ओर इशारा करते हैं या यह राजनीतिक टकराव का एक नया अध्याय है? लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान कराने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि हर पात्र नागरिक के मताधिकार और चुनावी संस्थाओं पर जनता के भरोसे का भी सवाल है।

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