लाईफ वर्सिटी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया बयान ने देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में नई बहस छेड़ दी है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदू परिवारों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमान मूलतः हिंदू समाज का हिस्सा हैं और “घर वापसी” की प्रक्रिया सामाजिक स्तर पर आगे बढ़नी चाहिए।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की मजबूती और जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए हिंदू परिवारों को तीन बच्चों का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने इसे सांस्कृतिक और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा।अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत के मुसलमान बाहर से नहीं आए, बल्कि इसी भूमि के मूल निवासी हैं। उनके अनुसार, ऐतिहासिक परिस्थितियों में धर्म परिवर्तन हुए, लेकिन सांस्कृतिक रूप से सभी भारतीय एक ही परंपरा से जुड़े हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने “घर वापसी” का उल्लेख किया।
भागवत के बयान के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
- कुछ संगठनों ने इसे सांस्कृतिक एकता का संदेश बताया।
- वहीं विपक्षी नेताओं ने जनसंख्या और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे को उठाते हुए बयान की आलोचना की है।
भारत में पहले से ही जनसंख्या नीति, महिला अधिकार, और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दे संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में “तीन बच्चे” और “मुसलमान भी हिंदू” जैसे बयान व्यापक बहस का विषय बन गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के वक्तव्यों का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव दूरगामी हो सकता है।