रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में मिशन अमृत 2.0 की राज्य स्तरीय हाई पावर स्टेयरिंग कमेटी की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज ट्रीटमेंट, जल निकायों के पुनरुद्धार और पार्क विकास से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
81 परियोजनाएं स्वीकृत, 45 को मिला काम
मिशन अमृत 2.0 के तहत प्रदेश में अब तक 81 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 64 परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 45 परियोजनाओं के कार्य आवंटित किए जा चुके हैं।
वर्तमान में 19 परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं। वहीं शेष 11 परियोजनाओं की डीपीआर को इस महीने के अंत तक मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है।
37 जल प्रदाय परियोजनाओं में 36 के कार्य आवंटित
जल प्रदाय योजनाओं के तहत स्वीकृत 37 परियोजनाओं में से 36 के कार्य आवंटित किए जा चुके हैं। बैठक में जगदलपुर की जल प्रदाय योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को प्रशासनिक स्वीकृति देने पर भी चर्चा हुई।
पांच शहरों में 333 एमएलडी क्षमता के 9 एसटीपी
प्रदेश के प्रमुख नगरीय निकायों अम्बिकापुर, राजनांदगांव, कोरबा, भिलाई और दुर्ग में 333 एमएलडी क्षमता के 9 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं पर करीब 465.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इन एसटीपी का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सीवेज के वैज्ञानिक उपचार और जल प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
चार शहरों में पार्क विकास को मंजूरी
शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए पिछले एक महीने में बिलासपुर, मुंगेली, कांकेर और अहिवारा में चार पार्क विकास परियोजनाओं के कार्य भी आवंटित किए गए हैं।
इसके अलावा अमृत शहरों के लिए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार करने से जुड़ी उप-योजना के तहत तैयार संशोधित स्टेट एक्शन प्लान के अनुमोदन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नगरीय प्रशासन एवं विकास, वित्त, जल संसाधन, आवास एवं पर्यावरण तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।