महतारी वंदन से मिली छोटी पूंजी, बिंदिया बाई ने पुश्तैनी ईंट कारोबार को दी नई मजबूती


गौरेला -पेंड्रा-मरवाही । हाथों में हुनर हो और उसे आगे बढ़ाने के लिए थोड़ी आर्थिक मदद मिल जाए, तो छोटी सी सहायता भी परिवार की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है। मरवाही विकासखंड के ग्राम धरहर की बिंदिया बाई प्रजापति इसकी मिसाल हैं। वर्षों से परिवार के साथ ईंट बनाने के पुश्तैनी कारोबार से जुड़ी बिंदिया बाई को महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि अब उनके लिए सिर्फ घरेलू खर्च का सहारा नहीं, बल्कि कारोबार की छोटी पूंजी भी बन गई है।

बिंदिया बाई और उनका परिवार लंबे समय से ईंट बनाने का काम करता है। मिट्टी तैयार करने से लेकर ईंटों को आकार देने, सुखाने और पकाने तक परिवार के सदस्य मिलकर मेहनत करते हैं। इसी काम से परिवार की आजीविका चलती है। हालांकि सीमित आमदनी के कारण कारोबार के लिए जरूरी सामग्री जुटाना कई बार चुनौती बन जाता था।


जरूरत की सामग्री के लिए लेना पड़ता था उधार

बिंदिया बाई बताती हैं कि पहले ईंट बनाने के लिए मिट्टी के साथ-साथ ईंटों को पकाने के लिए भूसी और लकड़ी जैसी सामग्री खरीदने में कई बार उधार लेना पड़ता था। छोटी जरूरत के लिए भी दूसरों से पैसे मांगने की मजबूरी रहती थी। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव बना रहता था।

महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने इस स्थिति को कुछ हद तक बदलने में मदद की है। बिंदिया बाई इस राशि को घरेलू जरूरतों के साथ अपने पुश्तैनी कारोबार में भी इस्तेमाल कर रही हैं।


एक हजार रुपए बने कारोबार की छोटी पूंजी

हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि बिंदिया बाई के लिए भले ही छोटी हो, लेकिन नियमित होने के कारण यह उनके कारोबार में एक भरोसेमंद पूंजी का काम कर रही है। इसी राशि से वे ईंट बनाने के लिए जरूरी सामग्री जुटाने में मदद लेती हैं। इससे छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उधार लेने की निर्भरता कम हुई है।

बिंदिया बाई का कहना है कि अब पहले की तरह हर छोटी जरूरत के लिए दूसरों से पैसे मांगने की मजबूरी नहीं रहती। नियमित आर्थिक सहायता ने परिवार को आर्थिक भरोसा दिया है और अपने काम को आगे बढ़ाने का हौसला भी बढ़ाया है।


महतारी वंदन से परिवार में बढ़ा आर्थिक भरोसा

बिंदिया बाई के अनुसार, योजना की राशि मिलने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने में मदद मिली है। इस सहायता से उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के साथ अपने व्यवसाय में भी पैसा लगाने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें परिवार के व्यवसाय में अधिक मजबूती से योगदान देने का अवसर दिया है।


महतारी वंदन के साथ प्रधानमंत्री आवास से मिली पक्की छत

बिंदिया बाई के परिवार को एक और बड़ी राहत प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली है। योजना के तहत परिवार को पक्का मकान मिला है। यानी एक ओर महतारी वंदन योजना से नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास योजना ने परिवार को सुरक्षित पक्की छत उपलब्ध कराई है।

बिंदिया बाई ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया है। उनका कहना है कि पक्का मकान मिलने से परिवार को सुरक्षित घर मिला है, जबकि महतारी वंदन की राशि से आर्थिक जरूरतों और कारोबार दोनों को संभालने में मदद मिल रही है।


सरकारी सहायता से हुनर को मिल रहा संबल

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रह रही है। कई महिलाएं इसका इस्तेमाल बचत, बच्चों की पढ़ाई और अपनी आजीविका को मजबूत करने के लिए भी कर रही हैं।

ग्राम धरहर की बिंदिया बाई की कहानी भी इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती है। ईंट बनाने के पुश्तैनी हुनर को उन्होंने सरकारी सहायता से मिले आर्थिक संबल से जोड़कर परिवार की आय को मजबूत करने की राह चुनी है।

कल तक ईंट बनाने के लिए जरूरी सामग्री जुटाने में उधार लेने वाली बिंदिया बाई आज हर महीने मिलने वाली राशि को अपने कारोबार में लगाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। एक ओर परिवार के सिर पर प्रधानमंत्री आवास योजना की पक्की छत है, तो दूसरी ओर हाथों में पुश्तैनी हुनर और उसे आगे बढ़ाने का भरोसा।

VIEW MORE

Category News