नरेंद्र पाण्डेय : छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर "बोरे-बासी" की थाली पर परोसी जा रही है – लेकिन इस बार स्वाद में नमक कम और आरोपों की मिर्च ज़्यादा है। भाजपा नेत्री राधिका खेड़ा ने भूपेश बघेल सरकार पर सीधा वार करते हुए कहा है कि बोरे-बासी अब कोई संस्कृति नहीं, बल्कि "कमीशनखोरी का कमर्शियल किचन" बन चुका है।
खेड़ा का दावा है – "कका के लिए बोरे-बासी माटी की महक नहीं, सत्ता की महफ़िल थी। केवल 5 घंटे में 8 करोड़ खर्च कर दिए गए – वो भी ऐसे कि एक थाली की कीमत 1500 रुपये और 8 रुपये की पानी की बोतलें 18 में खरीदी गईं। चार डोम बनाए गए लेकिन बिल छह का लगाया
गया।"
RTI दस्तावेजों से
खुलासा हुआ है कि
श्रमिक दिवस के मौके पर आयोजित "बोरे-बासी तिहार" के नाम पर छत्तीसगढ़ की सियासी रसोई में भ्रष्टाचार की
हांडी पकाई गई। RTI एक्टिविस्ट आशीष सोनी के मुताबिक, रायपुर से लेकर
बस्तर तक VIP थालियों में
सांस्कृतिक पहचान परोस दी गई, लेकिन निविदा की थाली खाली रही।
खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, "माटी को मां कहने वाले कका ने उसी माटी को इवेंट कंपनियों
के हवाले कर दिया, और दिल्ली की पॉलिटिक्स में उसे कमीशन की मिट्टी में मिला दिया।"
यह पहली बार नहीं है जब
बोरे-बासी तिहार विवादों में है। लेकिन इस बार RTI से आए दस्तावेजों ने पुराने स्वाद को कड़वाहट में बदल दिया
है।

उधर सरकार ने 'आयुष्मान' का ट्रॉमा चेकपोस्ट खोलकर सड़क दुर्घटनाओं में घायल आम नागरिकों को सरकार ने
राहत दी है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घोषणा की है कि अब दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैशलेस इलाज की
सुविधा मिलेगी – वो भी
पहले 7 दिनों तक, और ₹1.5 लाख तक। अगर एक ही परिवार से दो लोग दुर्घटना के शिकार होते हैं, तो ₹3 लाख, और तीन लोगों तक ₹4.5 लाख तक मुफ्त इलाज का प्रावधान किया गया है। लेकिन इलाज सिर्फ वहीं मिलेगा…
जहां अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से सूचीबद्ध होंगे। ऐसे अस्पतालों को न केवल इलाज की सुविधा देनी होगी, बल्कि अगर वो असमर्थ हैं, तो तुरंत मरीज को सक्षम अस्पताल में रेफर करना होगा और यह प्रक्रिया पोर्टल पर अपडेट भी करनी होगी। स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि अब ट्रॉमा और पॉलीट्रॉमा के अधिक अस्पतालों को योजना में जोड़ा जाएगा। राज्य के सभी CMHO को निर्देश दे दिए गए हैं कि किसी भी घायल व्यक्ति को इलाज से वंचित न किया जाए।
अब आप राजनीति और नीति का
फर्क समझिए -
जब एक ओर "बोरे-बासी" में घोटालों का भात
पक रहा है, वहीं दूसरी ओर "आयुष्मान भारत" सड़क पर घायल उस आम
आदमी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं, जो VIP थाली तो नहीं मांगता, लेकिन प्राथमिक इलाज की आस जरूर रखता है।
भ्रष्टाचार की थाली और
जनहित की पालिसी – यही है छत्तीसगढ़ की मौजूदा सियासत का स्वाद, जिसमें कहीं नमक कम है, कहीं मिर्च तेज, लेकिन जनता अब स्वाद के साथ सच भी चाहती है।