रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, बस्तर क्षेत्र के भाजपा और कांग्रेस से जुड़े 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में कटौती की तैयारी है। इनमें कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री कवासी लखमा और भाजपा नेता महेश गागड़ा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद कुछ नेताओं की Z+ श्रेणी की सुरक्षा को Z और Z श्रेणी की सुरक्षा को Y+ में बदला जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव से संबंधित आधिकारिक आदेश जारी होने की पुष्टि होना अभी बाकी है।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने दी सुरक्षा में कटौती के संकेत
प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से बातचीत में नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में कटौती किए जाने की जानकारी दी है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले छह महीनों में भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
बताया जा रहा है कि बस्तर में नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद सरकार ने नेताओं को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा की समीक्षा शुरू की है। इस प्रक्रिया के तहत सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और अन्य राजनीतिक नेताओं को मिली सुरक्षा का आकलन किया जा रहा है।
दीपक बैज ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने अपनी सुरक्षा श्रेणी Z+ से घटाकर Z किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बस्तर में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और अभी भी नक्सलियों की मौजूदगी का खतरा बना हुआ है।
बैज के मुताबिक, क्षेत्र में करीब एक दर्जन नक्सली अब भी मौजूद हैं, जबकि कुछ नक्सलियों के दूसरे राज्यों में चले जाने की बात भी कही जा रही है। ऐसे में सुरक्षा में कटौती करने से पहले जमीनी परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा घटाने के बाद कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी।
कर्मा परिवार सहित अन्य नेताओं की सुरक्षा की भी समीक्षा
बस्तर संभाग में सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव की प्रक्रिया के तहत कर्मा परिवार सहित अन्य नेताओं को मिली सुरक्षा की भी समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई है। भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं की सुरक्षा में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, किन नेताओं की सुरक्षा में कितनी कटौती होगी और किन्हें पूर्ववत सुरक्षा मिलेगी, इसकी स्पष्ट जानकारी आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही सामने आएगी।
VIP सुरक्षा पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च
छत्तीसगढ़ में नेताओं की VIP सुरक्षा पर होने वाला खर्च भी चर्चा का विषय है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में करीब 400 नेताओं की सुरक्षा में 1,550 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा 500 से ज्यादा वाहनों का इस्तेमाल भी सुरक्षा व्यवस्था में किया जा रहा है।
इन व्यवस्थाओं पर सालाना 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और खर्च का विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।
बस्तर क्षेत्र में छोटे स्तर के कई राजनीतिक नेताओं को भी सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की जानकारी है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा को पुलिस बल के बेहतर उपयोग और सरकारी खर्च से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
सुरक्षा में कटौती पर अब सबकी नजर
बस्तर में नक्सली गतिविधियों में कमी के बीच नेताओं की सुरक्षा घटाने की तैयारी ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर सरकार की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने क्षेत्र में खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं होने का तर्क दिया है।