SCGNEWS, भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जीवनदायिनी माँ नर्मदा के संरक्षण, पुनर्जीवन तथा दीर्घकालीन सतत् प्रबंधन के लिए 'निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन (नमन मिशन)' के गठन की स्वीकृति प्रदान की गयीइन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण पहल नर्मदा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन से जुड़ी है। मंत्रि-परिषद ने ‘निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन’ यानी ‘नमन मिशन’ के गठन को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार मध्यप्रदेश की लगभग 33 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नर्मदा और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है। इसलिए नर्मदा संरक्षण को केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी न मानकर वैज्ञानिक और बहु-विभागीय संस्थागत व्यवस्था के रूप में विकसित करने की योजना है।
नमन मिशन की संरचना भी व्यापक रखी गई है। मुख्यमंत्री इसकी साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे, जबकि 19 सहभागी विभागों के मंत्री सदस्य रहेंगे। नदी विज्ञान, जल विज्ञान, पर्यावरण, जैव विविधता और सामुदायिक प्रबंधन के विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। प्रशासनिक कार्यकारिणी समिति में राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के विशेषज्ञों को जोड़ने का प्रावधान है। इससे संकेत मिलता है कि नर्मदा संरक्षण को राजनीतिक घोषणा से आगे ले जाकर विशेषज्ञता और तकनीक से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मिशन के लिए वित्तीय व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। राज्य अनुदान से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये और वन विभाग की कैम्पा निधि से भी 100 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सीएसआर, केंद्रीय सहायता और पीपीपी मॉडल के माध्यम से संसाधन जुटाने की योजना है। परियोजनाओं के वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करेगी।
सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के 2026-27 से 2030-31 तक संचालन के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना के तहत लगभग 1.27 करोड़ महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 16,326.47 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को मजबूत करना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 11,835.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी महत्वपूर्ण है। इसमें उप स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा अस्पतालों की अधोसंरचना और आधुनिक उपकरणों पर खर्च शामिल है। आशा कार्यकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि की योजना के लिए 3,354.75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत लगभग 71 हजार आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी कड़ी के रूप में महत्वपूर्ण है।
कृषि शिक्षा और अनुसंधान के लिए 870 करोड़ 16 लाख रुपये तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण के लिए 734 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार पिछले 20 वर्षों में वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए बजट में लगभग 150 गुना वृद्धि हुई है। अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी, जीआईएस, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, ग्रामीण तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इन फैसलों को केवल बजट की घोषणाओं के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली कसौटी इनके जमीन पर क्रियान्वयन की होगी। नर्मदा का संरक्षण हो या स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, महिला सशक्तिकरण हो या वैज्ञानिक अनुसंधान—इन योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वीकृत धन, विशेषज्ञता और तकनीक का कितना प्रभावी उपयोग होता है। यदि योजनाएं परिणामों में बदलती हैं, तो मध्यप्रदेश का विकास मॉडल सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और वैज्ञानिक सोच—तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।।