छत्तीसगढ़ के 5 जलप्रपातों पर डाक विभाग ने जारी किए चित्र पोस्टकार्ड


रायपुर। भारतीय डाक विभाग ने राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत विश्व डाक दिवस एवं फिलेटली दिवस के अवसर पर रायपुर में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख जलप्रपातों—मांडवा, लंकापल्ली, चित्रकोट, तामड़ा घूमर और तीरथगढ़—पर आधारित चित्र पोस्टकार्ड जारी किए गए। इस पहल का उद्देश्य राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाना है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल श्री प्रणव कुमार, डाक सेवाओं के निदेशक श्री सुबोध प्रकाश सिंह तथा डाक लेखा निदेशक सुश्री नीरू उपस्थित रहीं।


डिजिटल युग में भी डाक सेवाओं की अहम भूमिका

मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्य पोस्टमास्टर जनरल श्री प्रणव कुमार ने बताया कि विश्व डाक दिवस प्रतिवर्ष 9 अक्टूबर को वर्ष 1874 में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (Universal Postal Union) की स्थापना की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नागरिकों और व्यवसायों के दैनिक जीवन के साथ-साथ वैश्विक सामाजिक एवं आर्थिक विकास में डाक सेवाओं की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

इस वर्ष विश्व डाक दिवस की थीम “One Postal Network, Infinite Possibilities” (एक डाक नेटवर्क, असीमित संभावनाएं) है। यह थीम एकीकृत डाक नेटवर्क की व्यापक पहुंच और उससे जुड़ी संभावनाओं को दर्शाती है।

श्री कुमार ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल संचार माध्यमों के तेजी से विस्तार ने लोगों के संवाद करने के तरीकों को बदल दिया है। इसके बावजूद डाक सेवाओं की प्रासंगिकता बनी हुई है। पत्र लेखन केवल सूचना पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं, विचारों और आत्मीयता को व्यक्त करने का भी एक सशक्त जरिया है। भारतीय डाक विभाग अपने व्यापक नेटवर्क के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक संचार सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


पांच जलप्रपातों की खूबसूरती अब पोस्टकार्ड के जरिए पहुंचेगी लोगों तक

राष्ट्रीय डाक सप्ताह के दौरान जारी किए गए चित्र पोस्टकार्ड छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक विरासत को प्रदर्शित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। मांडवा, लंकापल्ली, चित्रकोट, तामड़ा घूमर और तीरथगढ़ जलप्रपात राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं के प्रमुख प्रतीक हैं।

इन जलप्रपातों पर आधारित पोस्टकार्डों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक स्थलों को लोगों तक पहुंचाने और राज्य की पहचान को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम में फिलेटली यानी डाक टिकट संग्रह एवं अध्ययन के महत्व को भी रेखांकित किया गया। फिलेटली के माध्यम से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।


राष्ट्रीय डाक सप्ताह में होंगे विभिन्न आयोजन

छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल के विभिन्न संभागीय कार्यालयों में राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत विषयवार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी देने तथा डाक सेवाओं के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

डिजिटल संचार के बढ़ते दौर में भारतीय डाक विभाग की यह पहल बताती है कि डाक सेवाएं केवल पत्रों और पार्सलों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक विरासत और सामाजिक संपर्क को मजबूत बनाने में भी योगदान दे सकती हैं।

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