विकास की राह में हरियाली क्यों कटे? 33 केवी लाइन के लिए पेड़ों की छंटाई पर सवाल


रायपुर, मोवा। मोवा क्षेत्र में 33 केवी हाईटेंशन विद्युत लाइन बिछाने के दौरान पेड़ों की छंटाई को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन विद्युत लाइन के निर्माण के नाम पर वर्षों में विकसित हुई हरियाली को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। लोगों ने बिजली कंपनी से वैकल्पिक तकनीकी उपाय अपनाकर पेड़ों को अधिकतम सुरक्षित रखने की मांग की है।

मामला सन सिटी से गणपति टावर तक बिछाई जा रही 33 केवी हाईटेंशन लाइन से जुड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक लाइन के रास्ते में बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद हैं और निर्माण कार्य के दौरान कई पेड़ों की शाखाओं की छंटाई की जा रही है। जिस क्षेत्र में यह काम चल रहा है, वहां 100 से अधिक पेड़-पौधे होने की बात कही जा रही है।

10 साल से हर साल 10 हजार पौधे लगाने का अभियान

इस मामले में पर्यावरण प्रेमी प्रकाश राठौर की आपत्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे पिछले करीब 10 वर्षों से शहर में हरियाली बढ़ाने के अभियान से जुड़े हैं। नौकरी के बाद प्रतिदिन लगभग 3 घंटे पौधों की देखभाल में लगाने वाले राठौर हर साल करीब 10 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य लेकर काम करते हैं।

पौधारोपण और उनकी देखभाल पर वे सालाना करीब 3 से 4 लाख रुपए अपनी जेब से खर्च करते हैं। नीम, बरगद, पीपल और गुलमोहर जैसे पर्यावरण के लिए उपयोगी पेड़ों को वे प्राथमिकता देते हैं। उनका कहना है कि पौधा लगाना आसान है, लेकिन उसे पेड़ बनने तक लगातार पानी देना, सुरक्षा करना और देखभाल करना बड़ी जिम्मेदारी है।

जहां परेशानी, वहां लगाते हैं पौधे

राठौर का अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है। सड़क किनारे धूल, तेज धूप और गर्मी से परेशान लोगों को राहत देने के लिए वे सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाते हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर जाली लगाई जाती है और उनके आसपास की सफाई भी की जाती है।

पिछले वर्षों में सन सिटी मार्ग, पीएम आवास कैंपस, टिकरापारा चौक, गीतांजलि नगर गार्डन, मोवा पानी टंकी के पास मैदान, मोवा स्कूल, समर्पण अस्पताल कैंपस, छत्तीसगढ़ अस्पताल कैंपस, मोवा कब्रिस्तान और ग्राम सिंगनसरा सहित कई स्थानों पर पौधारोपण किया गया है। इनमें लगाए गए कई पौधे अब बड़े पेड़ों का रूप ले चुके हैं।


बच्चों को भी अभियान से जोड़ रहे

इस अभियान में राठौर का परिवार और कॉलोनी के बच्चे भी हिस्सा लेते हैं। उनका प्रयास है कि बच्चों को केवल पौधा लगाना ही नहीं, बल्कि उसकी नियमित देखभाल करना भी सिखाया जाए। राठौर का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की आदत बचपन से विकसित होगी, तभी लंबे समय में इसका असर दिखाई देगा।

विभाग का पक्ष भी जरूरी

वहीं, विद्युत विभाग की ओर से कहा गया है कि पेड़ों को जड़ से नहीं काटा जा रहा है। विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुरूप केवल आवश्यक शाखाओं की छंटाई की जा रही है। विभाग का प्रयास है कि लाइन निर्माण के दौरान पेड़ों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे और जहां संभव हो, उन्हें सुरक्षित रखा जाए।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि लाइन निर्माण से पहले पेड़ों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए और पीपल, नीम, जामुन, इमली जैसे महत्वपूर्ण पेड़ों को विशेष रूप से सुरक्षित रखा जाए।

दस साल से हजारों पौधे लगाकर उनकी देखभाल कर रहे राठौर का सवाल यही है कि विकास और हरियाली में किसी एक को चुनने के बजाय ऐसा रास्ता क्यों नहीं निकाला जाए, जिसमें बिजली की जरूरत भी पूरी हो और शहर के पेड़ भी सुरक्षित रहें।

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