रवि कुमार अग्रवाल... (रायगढ़)। रायगढ़ कलेक्ट्रेट की राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में पदस्थ बाबू राजकुमार सिदार के खिलाफ ACB की कार्यवाही ने पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक कथित रिश्वत प्रकरण ने अब ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब केवल व्यापक और निष्पक्ष जाँच से ही मिल सकते हैं।
मामला उस समय बीते दिनाँक 28 जुलाई 2026 को सुर्खियों में आया जब ग्राम बुलाकी, तहसील पुसौर निवासी विजय सिदार की शिकायत पर ACB ने कार्यवाही की। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2023 में सर्पदंश से पत्नी रामकुमारी की मृत्यु के बाद शासन से मिलने वाली राहत राशि शीघ्र दिलाने के एवज में आरोपी बाबू राजकुमार सिदार द्वारा कथित रूप से 50 हजार रुपये का हस्ताक्षरित चेक बतौर गारंटी की माँग की गई थी। इसी शिकायत के आधार पर ACB ने कार्यवाही की।
पूरे कार्यकाल के मुआवजा रिकॉर्ड की निष्पक्ष जाँच और सार्वजनिक ऑडिट की उठी माँग... कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के सामने जवाबदेही की बड़ी चुनौती
लेकिन अब सवाल सिर्फ इस एक प्रकरण का नहीं रह गया है।
क्या यह सिर्फ एक शिकायत है... या बड़ी जाँच की शुरुआत ?
जिले में चर्चा का विषय यह बन गया है कि, यदि एक हितग्राही ने शिकायत कर दी और मामला ACB तक पहुँच गया, तो क्या पूर्व में निपटाए गए अन्य मुआवजा प्रकरणों में भी कहीं इसी तरह की शिकायतें दबकर रह गई होंगी ?
इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि, अब पूरे आरोपी बाबू राजकुमार सिदार के कार्यकाल के दौरान निपटाए गए सभी मुआवजा प्रकरणों की स्वतंत्र जाँच और रिकॉर्ड की समीक्षा की माँग जोर पकड़ रही है।
SCG NEWS के पाँच बड़े सवाल...
क्या राजकुमार सिदार के पूरे कार्यकाल के सभी मुआवजा प्रकरणों की विशेष जाँच होगी ?
क्या प्रत्येक हितग्राही से संपर्क कर यह पता लगाया जाएगा कि, उनसे किसी प्रकार की कथित अवैध माँग की गई थी या नहीं ?
क्या राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा के भुगतान और स्वीकृति प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाएगा ?
क्या संपूर्ण रिकॉर्ड सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी ?
यदि जाँच में अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं, तो क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होगी ?
अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा...
ACB की कार्यवाही के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिक गई हैं। लोगों की अपेक्षा है कि, जाँच केवल एक प्रकरण तक सीमित न रहकर, यदि आवश्यक हो तो बाबू राजकुमार सिदार के पूरे कार्यकाल के मुआवजा वितरण की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि, सभी पात्र हितग्राहियों को बिना किसी अनुचित बाधा के शासन की सहायता मिली या नहीं।
जनता को अब किस बात का इंतजार है ?
रायगढ़ की जनता अब यह देखना चाहती है कि, जिला प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता और गंभीरता दिखाता है। यदि व्यापक जाँच होती है, तो इससे न केवल तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं में आम लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल...
क्या जाँच एक कथित रिश्वत प्रकरण तक सीमित रहेगी, या राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा के पूरे कार्यकाल का रिकॉर्ड खंगालकर हर तथ्य जनता के सामने लाया जाएगा ?