SCG NEWS : छत्तीसगढ़ के औद्योगिक जिले रायगढ़ में कारखानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। कारखानों में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान 10 आपराधिक प्रकरण श्रम न्यायालय में दायर किए गए। वहीं, श्रम न्यायालय ने इन दोनों महीनों में 12 प्रकरणों में संबंधित कारखाना प्रबंधन को दोषी पाते हुए कुल 11 लाख 83 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
कार्रवाई के दायरे में स्टील, पावर और सीमेंट उद्योगों से जुड़ी कई कंपनियां शामिल हैं। विभाग के अनुसार, औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन कराने के लिए निरीक्षण तथा न्यायिक कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में सुरक्षा संबंधी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। इनमें कारखाना अधिनियम, 1948, छत्तीसगढ़ कारखाना नियमावली, 1962 और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 सहित लागू कानूनी प्रावधान शामिल हैं।
इन प्रकरणों में कारखानों के अधिभोगियों, प्रबंधकों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ श्रम न्यायालय में मामले प्रस्तुत किए गए हैं।
विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना और श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना है।
अगस्त और सितंबर में 10 आपराधिक प्रकरण दायर
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अगस्त 2026 में चार और सितंबर 2026 में छह आपराधिक प्रकरण श्रम न्यायालय में दायर किए गए।
इन मामलों में NRVS स्टील लिमिटेड, जिंदल पैंथर सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड, MSP स्टील एंड पावर लिमिटेड, मांशिवा स्टील एंड एलॉयज LLP, जिंदल स्टील लिमिटेड, अंजनी स्टील लिमिटेड और सिंघल स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े प्रकरण शामिल हैं।
ये मामले कारखाना सुरक्षा और निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा एवं सेवा शर्तों से संबंधित कानूनी प्रावधानों के कथित उल्लंघन के आधार पर दर्ज किए गए हैं।
इन कंपनियों पर लगाया गया अर्थदंड
श्रम न्यायालय ने अगस्त और सितंबर 2026 में विभिन्न मामलों में अर्थदंड लगाया। विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, प्रमुख कार्रवाइयां इस प्रकार हैं:
- महालक्ष्मी कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड: 1 लाख रुपये।
- सुनील इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड: अगस्त में 1.50 लाख रुपये और सितंबर में 50 हजार रुपये।
- मांशिवा स्टील एंड एलॉयज LLP: 75 हजार रुपये।
- रायगढ़ इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड: 50 हजार रुपये।
- जिंदल पैंथर सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड: 8 हजार रुपये।
- MSP स्टील एंड पावर लिमिटेड: दो अलग-अलग मामलों में 50-50 हजार रुपये।
- SS स्टील एंड पावर: 1.50 लाख रुपये।
- NRVS स्टील लिमिटेड: 1 लाख रुपये।
- श्री रूपणाधाम स्टील प्राइवेट लिमिटेड: 1 लाख रुपये।
- नर्मदा आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड: 3 लाख रुपये।
विभाग के अनुसार, इन दोनों महीनों में 12 प्रकरणों में कुल 11.83 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
श्रमिकों की सुरक्षा पर कितना ध्यान?
रायगढ़ छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां स्टील, पावर और सीमेंट उद्योगों में बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं। ऐसे में कारखानों में सुरक्षा मानकों का पालन केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
औद्योगिक इकाइयों में मशीनों का सुरक्षित संचालन, आवश्यक सुरक्षा उपकरण, कार्यस्थल की सुरक्षित परिस्थितियां और निर्धारित नियमों का पालन दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में विभागीय निरीक्षण और न्यायालय की कार्रवाई के साथ यह भी जरूरी है कि उद्योग प्रबंधन सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करें और किसी भी कमी को समय रहते दूर करें।
विभाग ने निरीक्षण और कार्रवाई जारी रखने की बात कही
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अनुसार, कारखानों में सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण और कानूनी कार्रवाई लगातार की जा रही है।
सवाल: औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। क्या नियमित निरीक्षण और प्रभावी अनुपालन से कारखानों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा? इसका जवाब उद्योग प्रबंधन, संबंधित विभाग और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए लागू व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में छिपा है।