रवि कुमारअग्रवाल...(रायगढ़)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के छाल थाना क्षेत्र में मारपीट, लूटपाट, धमकी और कथित अपहरण से जुड़ा मामला अब गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है। पीड़ित पक्ष ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज होने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्यवाही नहीं की जा रही है। मामले को लेकर पीड़ितों ने अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) तथा पुलिस अधीक्षक रायगढ़ के समक्ष लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जाँच, आरोपियों की गिरफ्तारी और जान-माल की सुरक्षा की माँग की है।
6 अगस्त की रात रास्ता रोककर मारपीट और लूट का आरोप
शिकायत के अनुसार, 6 अगस्त 2026 की रात करीब 9 बजे बड़े डूमरपाली निवासी मालिकराम डनसेना वाहन चालकों को खाना देने के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान ठाकुरदेव देवरास गेट के पास कुछ लोगों द्वारा वाहनों को रोककर विवाद किए जाने की सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुँचे।
आरोप है कि वहाँ मौजूद शेखर डनसेना, दुर्गा डनसेना, गुलाब डनसेना, कोमल दर्शन, विक्रम महंत, प्रेम राठिया और खिलेश्वर कुम्हार सहित अन्य लोगों ने रास्ता रोककर गाली-गलौज की। शिकायतकर्ता के मुताबिक, विरोध करने पर चाकू से हमला किया गया, जिससे कपड़े फट गए और चोटें आईं। इसी दौरान जेब में रखे करीब 2200 रुपये छीनने तथा हाईवा वाहन के पहिए की हवा निकालने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि घटना के बाद पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन अपराध दर्ज होने में देरी हुई। इसके बाद 19 अगस्त को छाल थाने में अपराध क्रमांक 0195/2026 के तहत BNS की धारा 296, 351(3), 115(2), 126(2), 119(1) एवं 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया।
गवाह के घर में घुसने और बोलेरो में ले जाने का गंभीर आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब घटना के गवाह बताए जा रहे डोरीलाल खड़िया ने भी गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के मुताबिक, 13 अगस्त की रात करीब 9 बजे दुर्गा डनसेना, घनश्याम डनसेना और गुलाब डनसेना कथित रूप से डोरीलाल के घर में घुस गए।
आरोप है कि इस दौरान उसकी माँ मांगमती खड़िया के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। इसके बाद डोरीलाल को जबरन सफेद बोलेरो वाहन में बैठाकर ले जाया गया।
पीड़ित के अनुसार, रास्ते में उसके साथ मारपीट की गई और रात करीब 12 बजे उसे एक स्थान पर ले जाकर राजीनामे के लिए दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उससे सादे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर भी करवाए गए।
गांव-गांव पंचायत और धमकी का भी आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद आरोपियों द्वारा गांव-गांव पंचायत कराकर पीड़ितों और गवाहों पर राजीनामा करने तथा बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुराने केस से भी जुड़े हैं आरोपियों के नाम
शिकायत में अपराध क्रमांक 0143/2026 का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत BNS की धारा 308(2) एवं 3(5) में मामला दर्ज होने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उक्त पुराने मामले में वाहन चालकों से कथित तौर पर प्रति माह 700 रुपये की वसूली और धमकाने से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं। बताया गया है कि 24 अगस्त को धर्मजयगढ़ न्यायालय में चालान पेश किया गया, जिसके बाद संबंधित आरोपियों को जमानत मिल गई।
पीड़ित पक्ष का सवाल है कि जब इसी दौरान अपराध क्रमांक 0195/2026 में गंभीर धाराओं के तहत नया मामला दर्ज है, तो आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्यवाही क्यों नहीं की गई ?
अब पुलिस के आला अधिकारियों की कार्यवाही पर नजर
लगातार धमकी और स्थानीय स्तर पर अपेक्षित कार्यवाही नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित पक्ष ने अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। शिकायत में आरोपियों के खिलाफ जाँच कर कड़ी कार्यवाही, गिरफ्तारी तथा पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या छाल पुलिस पर लगे कथित शिथिलता और संरक्षण के आरोपों की वरिष्ठ स्तर पर जाँच होगी ? क्या मामले में नामजद आरोपियों पर कानून के मुताबिक कार्यवाही होगी ? और क्या पीड़ित व गवाहों को सुरक्षा मिल पाएगी ?
मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।