रवि कुमारअग्रवाल...(रायगढ़)। संबलपुरी गोठान में गौसेवा और संचालन की जिम्मेदारी को लेकर सामने आया विवाद अब प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्णय के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करीब तीन वर्षों से गौवंशों एवं अन्य पशुओं की सेवा, चारा-पानी, साफ-सफाई, उपचार, सुरक्षा और रख-रखाव से जुड़ी जिम्मेदारी निभाने वाली आनंदम पशु एवं पक्षी सेवा संस्था की अध्यक्ष श्रीमती पूनम द्विवेदी के 18 अगस्त 2026 के आवेदन और उसके बाद सामने आए WhatsApp चैट स्क्रीनशॉट को साथ रखकर देखने पर पूरे घटनाक्रम की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
मामला केवल यह नहीं है कि संबलपुरी गोठान की जिम्मेदारी अब कौन संभालेगा, बल्कि सवाल यह भी है कि जिम्मेदारी में बदलाव किस लिखित आदेश, किस अनुमोदन और किस प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ ?
18 अगस्त के आवेदन में क्या कहा गया था ?
SCG News की पूर्व प्रकाशित खबर के अनुसार, श्रीमती पूनम द्विवेदी ने संबलपुरी गोठान की प्रत्यक्ष देखरेख एवं संचालन की जिम्मेदारी से अलग होने के लिए जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था।
आवेदन में करीब तीन वर्षों से किए जा रहे सेवा कार्य का उल्लेख करते हुए गोठान में मौजूद पशुओं के लिए स्थायी, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करने की माँग की गई थी।
उपलब्ध आवेदन में यह भी उल्लेख है कि आवश्यकतानुसार संबंधित अभिलेख, फोटो और वीडियो सक्षम स्तर पर प्रस्तुत किए जा सकते हैं तथा जिलाध्यक्ष के आदेश/अनुमोदन के बाद ही सेवा कार्य से औपचारिक रूप से अलग होने की बात कही गई थी।
यानी आवेदन की भाषा से यह संकेत मिलता है कि जिम्मेदारी से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया संबंधित स्तर से आदेश अथवा अनुमोदन के बाद पूरी होनी थी।
अब सामने आया WhatsApp चैट का स्क्रीनशॉट
इस खबर के साथ उपलब्ध WhatsApp स्क्रीनशॉट को भी दस्तावेजी संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है।
स्क्रीनशॉट के शीर्ष पर संपर्क का नाम “Brijesh Singh...” दिखाई दे रहा है। इसमें भेजे गए संदेश में लिखा है—
«“सर जय गौ माता नमस्कार
सुबह 9:30 के लगभग कल दिनांक 21/8/2026 को रामपुर से गांव वंश को उठाया गया जो कि संबलपुरी नहीं पहुंची है। देवी सिंह रामपुर के नाम से अभी सुबह व्यक्ति पहुंचा है और बहस कर रहा है कि आपके यहां गौ वंश को भेजा गया है। कृपया मुझे बताया जाए कि गौ वंश को कहां भेजा गया है।”»
संदेश के अंत में “देवी सिंह” और एक मोबाइल नंबर भी दिखाई दे रहा है।
स्क्रीनशॉट में संदेश का समय 10:09 बजे दर्ज है। ऊपर WhatsApp चैट में दिन Saturday दिखाई दे रहा है, जबकि संदेश के भीतर 21/8/2026 की घटना का उल्लेख किया गया है। इससे इतना स्पष्ट होता है कि संदेश में 21 अगस्त को रामपुर से उठाए गए गौवंश के संबलपुरी नहीं पहुँचने की जानकारी और उनके ठिकाने को लेकर सवाल किया गया था।
इसके बाद स्क्रीनशॉट में “Rmc Ramesh Tanti AHO” नाम से एक संपर्क/संदेश भी दिखाई देता है, जिसका समय 10:32 बजे दर्ज है। नीचे बातचीत का कुछ हिस्सा स्क्रीनशॉट में दिखाई देता है, लेकिन पूरा संदेश स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।
स्क्रीनशॉट क्या साबित करता है और क्या नहीं ?
यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध स्क्रीनशॉट को संदर्भित दस्तावेज/चैट साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर किसी व्यक्ति की आधिकारिक पहचान अथवा किसी WhatsApp संदेश को प्रशासनिक आदेश मान लेना उचित नहीं होगा।
हालांकि स्क्रीनशॉट में “Brijesh Singh...” नाम से सेव संपर्क दिखाई देता है, लेकिन इससे अकेले यह निर्णायक रूप से प्रमाणित नहीं होता कि यह वही अधिकारी हैं जिनका नाम प्रशासनिक पद से जोड़ा जा रहा है।
इसी तरह, यदि किसी अन्य उपलब्ध चैट में यह संदेश दर्ज है कि “आप हमारे गोठान को छोड़ दीजिए, हम लोग कर लेंगे अपना काम”, तो उस संदेश की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक होगी कि वह किस व्यक्ति ने, किस हैसियत से और किस प्रशासनिक निर्णय के आधार पर भेजा।
यही कारण है कि अब प्रशासन से दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है।
सवाल—18 अगस्त के आवेदन के बाद क्या हुआ ?
यदि 18 अगस्त के आवेदन में सेवा से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया को आदेश/अनुमोदन से जोड़ा गया था, तो उसके बाद गोठान की जिम्मेदारी में परिवर्तन कैसे हुआ ?
क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ ?
क्या संबंधित सक्षम अधिकारी से अनुमोदन लिया गया ?
क्या गोठान की जिम्मेदारी का औपचारिक हस्तांतरण किया गया ?
क्या हस्तांतरण के समय गोठान में मौजूद गौवंशों की संख्या, उनके चारा-पानी, उपचार, सफाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी व्यक्ति अथवा संस्था को लिखित रूप से सौंपी गई ?
उपलब्ध WhatsApp स्क्रीनशॉट में 21 अगस्त को रामपुर से उठाए गए गौवंश के संबलपुरी नहीं पहुँचने का उल्लेख है।
संदेश भेजने वाला व्यक्ति यह जानना चाहता है कि गौवंश को आखिर कहाँ भेजा गया। साथ ही संदेश में यह भी लिखा है कि देवी सिंह, रामपुर के नाम से एक व्यक्ति मौके पर पहुँचकर यह कह रहा था कि गौवंश को संबंधित गोठान में भेजा गया है।
यदि यह बातचीत आधिकारिक रूप से सत्यापित होती है, तो यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि 21 अगस्त को रामपुर से उठाए गए गौवंशों की वास्तविक आवाजाही क्या थी और उन्हें किस स्थान पर भेजा गया।
क्या इसके लिए कोई रिकॉर्ड बनाया गया था ?
क्या नगर निगम के पास पशुओं को उठाने और छोड़ने का विवरण उपलब्ध है ?
क्या संबंधित वाहन, चालक और कर्मचारियों का रिकॉर्ड मौजूद है ?
*इसी बीच 21-22 अगस्त को सड़क पर गौवंश छोड़ने का मामला*
संबलपुरी गोठान से जुड़ा यह विवाद उस समय और महत्वपूर्ण हो जाता है जब 21 और 22 अगस्त को रायगढ़ शहर से गौवंशों को पकड़कर पालीघाट रोड की ओर छोड़े जाने का मामला सामने आया।
SCG News की पूर्व पड़ताल में नगर निगम और ट्रैफिक विभाग की भूमिका को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। सड़क से आवारा गौवंश हटाने की कार्यवाही के बाद उनके लिए स्थायी व्यवस्था किए जाने के बजाय उन्हें सड़क किनारे छोड़ने की बात पर भी सवाल उठे थे।
ऐसे में अब यह जानना जरूरी हो जाता है कि शहर से पकड़े गए गौवंशों के लिए प्रशासन की वास्तविक व्यवस्था क्या थी और क्या संबलपुरी गोठान में उनके लिए पर्याप्त क्षमता एवं संसाधन उपलब्ध थे ?
क्या गोठान की जिम्मेदारी बदलने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था तैयार थी ?
*यह पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।*
यदि संबलपुरी गोठान की संचालन व्यवस्था में बदलाव किया गया, तो क्या उससे पहले नई व्यवस्था तैयार थी ?
क्या नए संचालक या जिम्मेदार व्यक्ति की नियुक्ति/जिम्मेदारी का कोई आदेश है ?
क्या पशुओं की संख्या और उनकी दैनिक जरूरतों का आकलन किया गया ?
क्या चारा, पानी, उपचार, सफाई और सुरक्षा के लिए बजट अथवा संसाधन निर्धारित किए गए ?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या जिम्मेदारी बदलने की पूरी प्रक्रिया लिखित रूप से दर्ज की गई ?
*राजनीतिक एवं गुटीय हस्तक्षेप के आरोपों पर भी जवाब जरूरी*
18 अगस्त के आवेदन में गोठान के संचालन को लेकर कथित राजनीतिक एवं गुटीय हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया गया था।
आवेदिका की ओर से ऐसी परिस्थितियों के कारण पहले की तरह निष्पक्ष रूप से सेवा कार्य जारी रखने में कठिनाई का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई थी।
*ऐसे में यह भी सवाल है कि आवेदन में लगाए गए आरोपों पर प्रशासन ने क्या कार्यवाही की ?*
क्या कोई जाँच कराई गई ?
क्या संबंधित पक्षों के बयान लिए गए ?
क्या गोठान की व्यवस्था को लेकर कोई लिखित निर्णय लिया गया ?
यदि निर्णय लिया गया तो उसकी प्रति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई ?
*“कौन बड़ा ?” नहीं, सवाल है—निर्णय किस अधिकार से हुआ ?*
इस पूरे प्रकरण में बहस किसी अधिकारी के बड़े या छोटे होने की नहीं है।
मुख्य सवाल यह है कि जिस जिम्मेदारी को बदलने या समाप्त करने का निर्णय लिया गया, वह किस सक्षम स्तर के आदेश से लिया गया ?
यदि जिलाध्यक्ष के आदेश/अनुमोदन की आवश्यकता थी तो वह आदेश कब जारी हुआ ?
यदि नगर निगम स्तर पर ही निर्णय लेने का अधिकार था तो संबंधित नियम अथवा आदेश क्या है ?
यदि कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ था, तो WhatsApp के माध्यम से जिम्मेदारी बदलने संबंधी कोई संदेश भेजा गया था तो उसका प्रशासनिक आधार क्या था ?
*आर्थिक लेन-देन को लेकर अभी कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं*
पूरे घटनाक्रम में भविष्य में आर्थिक लेन-देन अथवा निजी हित से जुड़े सवाल उठ सकते हैं, लेकिन उपलब्ध सामग्री के आधार पर फिलहाल किसी आर्थिक अनियमितता का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है।
इसलिए ऐसे किसी विषय को आरोप के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। यदि किसी वित्तीय अनियमितता की आशंका है तो उसकी पुष्टि केवल संबंधित भुगतान अभिलेख, बिल, बैंक रिकॉर्ड, अनुबंध अथवा सक्षम जाँच के माध्यम से ही हो सकती है।
*प्रशासन से 10 सीधे सवाल*
1. 18 अगस्त 2026 के आवेदन पर अब तक क्या कार्यवाही हुई ?
2. क्या श्रीमती पूनम द्विवेदी की जिम्मेदारी समाप्त अथवा हस्तांतरित करने का कोई लिखित आदेश जारी हुआ ?
3. यदि आदेश जारी हुआ तो किस अधिकारी ने और किस अधिकार के तहत जारी किया ?
4. आवेदन में उल्लेखित आदेश/अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हुई थी या नहीं ?
5. 21 अगस्त को रामपुर से उठाए गए गौवंशों को वास्तव में कहां भेजा गया ?
6. क्या उपलब्ध WhatsApp स्क्रीनशॉट की आधिकारिक जाँच अथवा पुष्टि कराई जाएगी ?
7. “Brijesh Singh...” नाम से दिखाई दे रहे WhatsApp संपर्क की आधिकारिक पहचान क्या है ?
8. यदि किसी अधिकारी की ओर से “गोठान छोड़ने” संबंधी संदेश भेजा गया था, तो उसका प्रशासनिक आधार क्या था ?
9. वर्तमान में संबलपुरी गोठान में मौजूद गौवंशों की जिम्मेदारी किसकी है ?
10. क्या संबलपुरी गोठान और 21-22 अगस्त के गौवंश प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रशासनिक जाँच कराई जाएगी ?
*अब प्रशासन के आधिकारिक जवाब का इंतजार*
संबलपुरी गोठान, रामपुर से उठाए गए गौवंश और पालीघाट रोड पर गौवंश छोड़े जाने से जुड़े घटनाक्रम को अलग-अलग देखने के बजाय यदि एक साथ देखा जाए तो कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं।
*मामला सिर्फ यह नहीं है कि गोठान कौन चलाएगा।*
असल सवाल यह है कि निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया, किस अधिकारी के आदेश से लिया गया, जिम्मेदारी किसे सौंपी गई और इस पूरी प्रक्रिया में गौवंशों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई या नहीं।
इस खबर के साथ उपलब्ध WhatsApp स्क्रीनशॉट को दस्तावेजी संदर्भ के रूप में इसलिए शामिल किया जा रहा है, ताकि संबंधित अधिकारी और प्रशासन स्वयं इसकी प्रामाणिकता, संदर्भ और पूरी बातचीत की स्थिति स्पष्ट कर सकें।
यदि 18 अगस्त के आवेदन के बाद कोई लिखित आदेश, अनुमोदन, जिम्मेदारी हस्तांतरण पत्र, पशुओं की आवाजाही का रिकॉर्ड अथवा अन्य संबंधित दस्तावेज जारी किए गए हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन और नगर निगम के आधिकारिक जवाब पर हैं।