रायपुर।(नरेन्द्र पाण्डेय ) : कभी-कभी किसी खबर की शुरुआत किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी मुलाकात से होती है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा और प्रबंध संचालक सौमिलि चौबे से मेरी मुलाकात भी ऐसी ही एक सौजन्य मुलाकात थी। कोई औपचारिक इंटरव्यू नहीं था, न ही सवालों की कोई लंबी सूची। लेकिन इस छोटी मुलाकात के दौरान पर्यटन मंडल के कार्यालय के वेटिंग हॉल में बैठे कुछ लोगों से बातचीत हुई तो लगा कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन को लेकर लोगों के मन में उम्मीदें भी बहुत हैं और कुछ सवाल भी।
वेटिंग हॉल में बैठे लोगों की बातचीत में एक बात बार-बार सामने आ रही थी—“छत्तीसगढ़ में पर्यटन की कमी नहीं है, बस उसे व्यवस्थित तरीके से दुनिया के सामने लाने की जरूरत है।”
यह बात शायद इस पूरे विषय का सार भी है।
हमारे पास सब कुछ है, फिर पर्यटक क्यों कम?
बस्तर के जलप्रपात और जंगल हैं, सरगुजा का मैनपाट है, जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता है, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत है, भोरमदेव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसके अलावा जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खान-पान, लोककला और जैव विविधता—छत्तीसगढ़ के पास ऐसा बहुत कुछ है, जिसे दूसरे राज्यों ने पर्यटन की ताकत बना लिया है। वेटिंग हॉल में बैठे एक व्यक्ति ने सहज सवाल किया— “अगर दूसरे राज्यों के पर्यटन स्थल करोड़ों पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं, तो छत्तीसगढ़ क्यों नहीं?”
सवाल सीधा था, लेकिन जवाब आसान नहीं। क्योंकि पर्यटन सिर्फ किसी सुंदर जगह का नाम नहीं है। पर्यटन एक पूरा इकोसिस्टम है—सड़क, परिवहन, होटल, गाइड, सुरक्षा, साफ-सफाई, डिजिटल जानकारी, ऑनलाइन बुकिंग और सबसे बढ़कर पर्यटक का अनुभव।
नीलू शर्मा से उम्मीद—छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग बदले
अध्यक्ष नीलू शर्मा से हुई सौजन्य मुलाकात में पर्यटन को लेकर उनकी सक्रियता और योजनाओं की झलक महसूस हुई। अब पर्यटन से जुड़े लोगों की उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग को एक नए अंदाज में देश और दुनिया के सामने रखा जाए।
एक व्यक्ति ने कहा— “हमारे यहां लोग घूमने आते हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं चलता कि आसपास और क्या-क्या देखा जा सकता है।”
यही वह जगह है जहां पर्यटन मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर किसी पर्यटक ने चित्रकोट देखा है तो उसे बस्तर की दूसरी जगहों की जानकारी कौन देगा? अगर कोई सिरपुर आया है तो उसे आसपास के अन्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों तक कौन पहुंचाएगा? एक पर्यटन स्थल नहीं, पूरा पर्यटन सर्किट बनाना होगा।
MD सौमिलि चौबे से उम्मीद—योजनाएं जमीन पर उतरें
पर्यटन मंडल की प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने में MD सौमिलि चौबे की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। वेटिंग हॉल में बैठे लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही थी कि योजनाएं फाइलों और बैठकों तक सीमित न रहें। जो योजना बने, उसकी समयसीमा तय हो और उसका परिणाम पर्यटन स्थल पर दिखाई दे। किसी ने कहा— “साहब, पर्यटक को पहले यह बताइए कि जाना कहां है, फिर यह बताइए कि वहां पहुंचकर उसे मिलेगा क्या।” यह छोटी-सी बात दरअसल पर्यटन प्रशासन की बड़ी चुनौती है।
डिजिटल पर्यटन अब विकल्प नहीं, जरूरत है
आज पर्यटक यात्रा शुरू करने से पहले Google, YouTube, Instagram और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जगह की जानकारी देखता है। कहां जाना है? कैसे जाना है? कहां रुकना है? क्या देखना है? कितना खर्च आएगा? ऑनलाइन बुकिंग कहां होगी?
इन सवालों का जवाब अगर एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिल जाए तो पर्यटक के लिए छत्तीसगढ़ घूमना काफी आसान हो सकता है।इस दिशा में पर्यटन मंडल की डिजिटल पहल उम्मीद जगाती है। लेकिन लोगों की अपेक्षा है कि डिजिटल प्रमोशन सिर्फ सुंदर वीडियो तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक बुकिंग और यात्रा सुविधा से भी जुड़े।
स्थानीय लोगों को पर्यटन का मालिक बनाना होगा
बातचीत में एक और महत्वपूर्ण विषय सामने आया—स्थानीय रोजगार। अगर बस्तर में पर्यटक आते हैं तो उसका लाभ बस्तर के युवा को क्यों न मिले?
स्थानीय युवक प्रशिक्षित गाइड बन सकते हैं। महिलाएं होमस्टे चला सकती हैं। स्थानीय कलाकार अपनी कला और हस्तशिल्प बेच सकते हैं। गांव के लोग स्थानीय भोजन और संस्कृति को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बना सकते हैं। यानी पर्यटन का पैसा बाहर जाने के बजाय स्थानीय अर्थव्यवस्था में घूमे। यही मॉडल छत्तीसगढ़ पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
बस्तर और सरगुजा को सिर्फ जंगल और पहाड़ के रूप में न देखें
छत्तीसगढ़ के दूरस्थ इलाकों की चर्चा के दौरान एक बात साफ थी—बस्तर और सरगुजा को केवल प्राकृतिक पर्यटन के नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है। यहां संस्कृति, परंपरा, लोककला, आदिवासी जीवन, खान-पान और इतिहास भी पर्यटन की बड़ी ताकत हैं। जरूरत इस बात की है कि स्थानीय संस्कृति को पर्यटक के सामने सम्मानजनक और संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया जाए।
अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की
पर्यटन मंडल के सामने संभावनाएं बड़ी हैं। नीतियां बन रही हैं, प्रचार की योजनाएं हैं, निजी निवेश की संभावनाएं हैं और डिजिटल पर्यटन की बात हो रही है। लेकिन अब असली सवाल यह है कि इन सबका असर जमीन पर कब और कितना दिखाई देगा?
नीलू शर्मा के नेतृत्व और सौमिलि चौबे की प्रशासनिक भूमिका से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को यही उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन को एक स्पष्ट दिशा मिलेगी।
मेरी इस छोटी-सी सौजन्य मुलाकात का सबसे दिलचस्प हिस्सा शायद अध्यक्ष और MD से बातचीत से ज्यादा वह बातचीत थी जो वेटिंग हॉल में बैठे आम लोगों से हुई। उनकी बातें किसी सरकारी रिपोर्ट का हिस्सा नहीं थीं, लेकिन उनमें छत्तीसगढ़ के पर्यटन की असली तस्वीर जरूर दिखाई दी। उनकी अपेक्षा बहुत बड़ी नहीं है। बस इतना कि—“छत्तीसगढ़ घूमने आए पर्यटक को लगे कि उसने सही जगह चुनी है… और यहां के लोगों को लगे कि पर्यटक उनके लिए भी कुछ छोड़कर गया है।”