कामधेनु विवि में 50 बैकडोर नियुक्तियों पर हाईकोर्ट सख्त


राज्य शासन के स्पष्ट आदेशों को दरकिनार कर मनमानी करना कामधेनु विश्वविद्यालय प्रशासन के गले की फांस बन गया है। राज्य शासन द्वारा नई नियुक्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर 50 लोगों को बैकडोर से काम पर रख लिया गया। कागजों में कृषि मजदूर दर्शाकर दैनिक वेतनभोगी के रूप में खपाए गए इन कर्मियों ने अब अपने नियमितीकरण के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने कामधेनु विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए नोटिस थमाकर जवाब-तलब किया है।


कागजों में कृषि मजदूर बनाकर खपाया

राज्य शासन ने 5 मार्च 2008 को एक आदेश जारी करके राज्य के सभी शासकीय संस्थानों में दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की नई नियुक्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस सख्त प्रतिबंध के बावजूद कामधेनु विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन के नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की और 50 लोगों को बैकडोर से काम पर रख लिया। प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इन कर्मचारियों को रिकॉर्ड में केवल कृषि मजदूर दर्ज किया गया।पिछले 10 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे इन कर्मियों को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से न तो कोई औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी किया गया और न ही कोई पहचान पत्र प्रदान किया गया। दैनिक वेतन पर काम कर रहे इन कर्मियों ने अब अपनी इस एक दशक लंबी निरंतर सेवा को आधार बनाकर नियमितीकरण दिए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इस पूरे विषय पर जब कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव से संपर्क साधा गया तो उन्होंने मामले पर पूरी तरह चुप्पी साध ली और कोई भी जवाब देने से साफ मना कर दिया।

बता दें कि कामधेनु विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति पहले से ही काफी बदहाल चल रही है। स्थिति यह है कि यहां कार्यरत नियमित स्टाफ तक को समय पर वेतन का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मामले के जानकारों का कहना है कि जब राज्य शासन का सख्त प्रतिबंध लागू था, तब इन कर्मियों को किस अधिकार के तहत विश्वविद्यालय में काम पर रखा गया। 


अब यदि हाईकोर्ट का फैसला इन कर्मचारियों के पक्ष में आता है और प्रशासन को इन्हें नियमित करना पड़ता है तो कामधेनु विश्वविद्यालय पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आ पड़ेगा, जिसे वहन करना विश्वविद्यालय प्रशासन के बूते से पूरी तरह बाहर होगा।

पटल परिवर्तन के नियमों की अवहेलना

कामधेनु विश्वविद्यालय परिसर में शासन के नियमों की अवहेलना का यह अकेला मामला नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग का यह स्पष्ट नियम है कि तीन वर्ष से अधिक समय तक कोई भी कर्मचारी एक ही पटल पर कार्यरत नहीं रहेगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस नियम का पालन सुनिश्चित कराने के लिए 3 अगस्त को एक रिमाइंडर भी भेजा था। इस पत्र को भेजे हुए बीते दो महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन ने फाइल को दबा दिया है। 


विश्वविद्यालय में 20 से अधिक कर्मचारी अपनी ज्वॉइनिंग के समय से ही एक ही टेबल पर जमे हुए हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी तो ऐसे भी हैं, जो पदोन्नति मिलने के बाद भी अपनी पुरानी कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। अब ऐसे में इन दैनिक वेतनभोगियों द्वारा लगाई गई याचिका ने इन मामलों को भी बाहर ला दिया है।

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