SCG/06/10/2026: बैकुंठपुर। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बैकुंठपुर में निर्माणाधीन 250 सीटर हाईटेक नालंदा परिसर की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के शुरुआती निर्माण चरण की तस्वीरों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
परिसर का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक अध्ययन केंद्र, पुस्तकालय, रीडिंग जोन सहित बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रही चिंताओं को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई जा रही है।
नींव के बाद ही उठे सवाल
निर्माण स्थल की तस्वीरों में नींव और शुरुआती निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि निर्माण कार्य स्वीकृत डिजाइन, तकनीकी मानकों और निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं। इतनी बड़ी राशि से बनने वाले परिसर में शुरुआती चरण से ही गुणवत्ता की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
करोड़ों के काम में गुणवत्ता जांच जरूरी
नालंदा परिसर युवाओं के भविष्य से जुड़ा प्रोजेक्ट है। निर्माण सामग्री, सरिया, सीमेंट, कंक्रीट सहित अन्य तकनीकी मानकों की नियमित जांच निर्माण के दौरान ही की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की संरचनात्मक समस्या सामने न आए।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण कार्य की निगरानी कौन कर रहा है और अब तक कितनी तकनीकी जांच की गई है। यदि निर्माण के दौरान कोई कमी सामने आती है तो उसे शुरुआती स्तर पर ही ठीक किया जाना जरूरी है।
सिर्फ भवन नहीं, युवाओं के भविष्य का सवाल
नालंदा परिसर को युवाओं के लिए अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता सीधे युवाओं के हितों को प्रभावित कर सकता है।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच, तकनीकी निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।