रायपुर। बच्चों में बढ़ते मोटापे और मधुमेह के खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों तथा आवासीय संस्थाओं में शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड लगाने की अनुशंसा की है। आयोग ने जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों के बढ़ते सेवन पर नियंत्रण के साथ बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित करने पर जोर दिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए जागरूकता के साथ व्यवहार में बदलाव जरूरी है।
लाल-पीला-हरा संकेत से समझेंगे खाद्य पदार्थ
प्रस्तावित बोर्ड में खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक और कैलोरी की मात्रा को सरल और दृश्य तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके लिए लाल, पीला और हरा ट्रैफिक लाइट सिस्टम अपनाने की अनुशंसा की गई है, ताकि बच्चे आसानी से स्वस्थ और अस्वस्थ खाद्य पदार्थों की पहचान कर सकें।
आयोग ने स्कूलों और आवासीय संस्थाओं में जंक फूड की बिक्री पर नियंत्रण तथा स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की है।
ईट राइट क्लब और छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर बनेंगे
विद्यालयों में ईट राइट क्लब और छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर बनाने का सुझाव दिया गया है। प्रार्थना सभा के दौरान पोषण और संतुलित आहार को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी अनुशंसा की गई है।
आश्रम शालाओं, पोटा केबिन, प्रयास और एकलव्य विद्यालयों में भोजन सारणी के साथ शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाने तथा स्थानीय पौष्टिक आहार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।
पालक-शिक्षक बैठकों में होगी पोषण पर चर्चा
आयोग ने पालकों और शिक्षकों की बैठकों में बच्चों के पोषण एवं संतुलित आहार पर चर्चा करने की अनुशंसा की है। पालकों को बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित करने और बेहतर प्रयास करने वाले पालकों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया है।