मौत के रिकॉर्ड पर 'कौन खोजेगा?' का जवाब! निगम के वार्ड मोहरीर की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल


रवि कुमार अग्रवाल...(रायगढ़)। रायगढ़ नगर पालिक निगम में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े कार्यों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि निगम में वार्ड मोहरीर के पद पर कार्यरत जीवर्धन चौहान, जिन्हें निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय द्वारा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र एवं डूडा से संबंधित कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ने एक आवेदक के साथ ऐसा व्यवहार किया जिससे पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

मामला आज 27 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति वर्ष 2017 में मृत हुए उनकी मृत्यु प्रमाण पत्र की द्वितीय प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदक निगम कार्यालय पहुँचा। आवेदन में केवल मई 2017 का उल्लेख था, जबकि मृत्यु की सटीक तिथि अंकित नहीं थी।

आरोप है कि आवेदन देखने के बाद वार्ड मोहरीर जीवर्धन चौहान ने कहा कि, "केवल वर्ष लिख देने से द्वितीय मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा, कौन खोजेगा? जब तक पूरी मृत्यु तिथि नहीं लिखी जाएगी, तब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं होगा।"

बताया जाता है कि इसके बाद आवेदक ने अनुरोध किया कि यदि आवेदन में कोई कमी है तो उसी आशय का कारण लिखित रूप में उपलब्ध करा दिया जाए, ताकि वह आवश्यक जानकारी जोड़कर पुनः आवेदन प्रस्तुत कर सके। आरोप है कि इस पर वार्ड मोहरीर ने लिखित में कोई टिप्पणी या कारण देने से इनकार कर दिया और कथित रूप से कहा, "कौन खोजेगा, इस बात को कैसे लिखकर दूँ ?"


बड़े सवाल यह है कि...


- यदि आवेदन अधूरा था तो क्या संबंधित कर्मचारी का दायित्व नहीं था कि वह आवेदक को लिखित रूप से कमियों की जानकारी देता ?

- क्या नागरिकों को केवल मौखिक रूप से टाल देना सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की भावना के अनुरूप है ?

- क्या कार्यालय में उपलब्ध जन्म-मृत्यु अभिलेखों के आधार पर रिकॉर्ड खोजने की कोई निर्धारित प्रक्रिया नहीं है ?

- यदि किसी आवेदन में कमी हो तो क्या उसे लिखित आपत्ति अथवा आवश्यक मार्गदर्शन के साथ वापस नहीं किया जाना चाहिए ?


क्या यही है 'विष्णु का सुशासन ?


छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार लगातार "सुशासन, पारदर्शिता और नागरिकों को समयबद्ध एवं सम्मानजनक सेवाएं" उपलब्ध कराने की बात करती रही है। ऐसे में यदि किसी नागरिक को केवल आवश्यक मार्गदर्शन के अभाव में कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें और लिखित कारण तक उपलब्ध न कराया जाए, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।


हालांकि, इस मामले में संबंधित कर्मचारी और नगर निगम प्रशासन का पक्ष सामने आना भी उतना ही आवश्यक है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शासन की सुशासन संबंधी मंशा के अनुरूप सेवा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करता है। वहीं यदि किसी प्रक्रिया या नियम के कारण आवेदन स्वीकार नहीं किया गया, तो उसकी स्पष्ट और लिखित जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराना भी पारदर्शी प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।


नियमों के संदर्भ में


जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 तथा उससे संबंधित नियमों के अंतर्गत किया जाता है। सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार यदि किसी आवेदन में आवश्यक जानकारी का अभाव हो, तो संबंधित कार्यालय आवेदक को आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने के लिए सूचित करता है। नागरिकों को स्पष्ट जानकारी और कारण उपलब्ध कराना सुशासन एवं जवाबदेही का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।


lप्रशासन से अपेक्षा


यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति की परेशानी का मामला नहीं बल्कि नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। अपेक्षा की जा रही है कि नगर निगम प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराए, संबंधित कर्मचारी का पक्ष भी सुने तथा यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे, ताकि भविष्य में किसी भी नागरिक को जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज़ के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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