छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2161 करोड़ के शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के माध्यम से अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंच चुकी है। ईडी ने 53 दिन पहले पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार करने के बाद सोमवार को भूपेश बघेल के निवास समेत 14 ठिकानों पर छापेमारी कर जांच का दायरा और व्यापक कर दिया। इस छापेमारी ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है।
सोमवार सुबह 7 बजे ईडी की टीम भारी सुरक्षा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री
भूपेश बघेल के भिलाई स्थित निवास पहुंची। करीब 20 ईडी अधिकारियों की टीम ने
सीआरपीएफ के जवानों के साथ मिलकर छापेमारी शुरू की। यह छापेमारी लगभग 11 घंटे तक चली,
जिसमें घर के
भीतर प्रत्येक कमरे की तलाशी ली गई। इस दौरान बघेल परिवार के सदस्य, उनकी पत्नी,
बहू, बेटे, बेटियां और
नाती-पोतों के कमरों को भी खंगाला गया। दोपहर करीब 2:47 बजे ईडी ने एसबीआई से नोट
गिनने की मशीन मंगवाई और 33 लाख रुपए नकद, 150 एकड़ जमीन के दस्तावेज और जेवर जब्त किए।
ईडी के छापे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे केंद्र सरकार की
राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से पहले
पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के निवास पर छापेमारी हुई और उन्हें गिरफ्तार किया
गया, ठीक उसी प्रकार अब उनके निवास पर छापा मारा गया है। बघेल ने कहा कि ईडी उनके
परिवार के स्त्रीधन और खेती से जुड़े दस्तावेज जब्त कर रही है, जबकि इसका किसी
भी प्रकार से शराब घोटाले से संबंध नहीं है। उन्होंने इस कार्रवाई को विपक्ष को
डराने का प्रयास करार दिया।
ईडी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यकाल के दौरान आबकारी नीति में बड़े
पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। यह आरोप है कि शराब कारोबारियों से करोड़ों रुपए की
उगाही की गई, जिसे सरकार से जुड़े नेताओं, अफसरों और करीबी लोगों तक पहुंचाया गया। इस पूरे मामले में
कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और भूपेश बघेल के बेटे
चैतन्य बघेल का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। सूर्यकांत तिवारी को पहले ही
गिरफ्तार कर लिया गया है और अब ईडी चैतन्य बघेल से पूछताछ के लिए मंगलवार को
बुलाने जा रही है।
ईडी ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश
बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से अर्जित धन से 4 करोड़ रुपए का मकान खरीदा
है। इसके अलावा बंसल और त्रिलोक ढिल्लन जैसे कारोबारियों से किए गए लेन-देन के
सबूत भी सामने आए हैं। ईडी ने दावा किया है कि चैतन्य बघेल के मोबाइल से कई अहम
मैसेज और दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनसे घोटाले के तार पूर्व मुख्यमंत्री तक जुड़े होने का
अंदेशा है।
जैसे ही ईडी की कार्रवाई की खबर फैली, कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई।
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को केंद्र सरकार की राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए इसे
लोकतंत्र का दमन कहा। कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि ईडी और सीबीआई जैसी
एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को डराने के लिए किया जा रहा है। वहीं, भाजपा ने इसे
घोटाले का सच सामने लाने वाली कार्रवाई बताया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा
कि राज्य में कांग्रेस सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ, और अब इसका
पर्दाफाश हो रहा है।
ईडी का दावा है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआती चरण है और आगे कई बड़े खुलासे हो
सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, ईडी के पास करोड़ों रुपए के लेन-देन से संबंधित ठोस सबूत
हैं, जिनमें भूपेश बघेल, उनके करीबी नेता, अधिकारी और कारोबारी शामिल हैं। आने वाले दिनों
में ईडी चैतन्य बघेल, पूर्व मंत्री कवासी लखमा और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से
पूछताछ कर सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईडी की यह कार्रवाई केवल
राजनीतिक प्रतिशोध है या सच में छत्तीसगढ़ में 2161 करोड़ का शराब घोटाला हुआ है? क्या भूपेश बघेल इस घोटाले में सीधे जुड़े हुए
हैं या उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है?
जो भी हो, इस छापेमारी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। अब देखना
होगा कि ईडी की जांच आगे क्या मोड़ लेती है और क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
वाकई दोषी साबित होते हैं या नहीं।